झारखंड के छोटे गांव से अमेरिका तक का सफर, बोकारो की बेटी बनी हजारों छात्राओं की प्रेरणा
बोकारो | 20 मई 2026
झारखंड के बोकारो जिले के एक छोटे से गांव कुम्हारडीह की बेटी ने ऐसा इतिहास रचा है, जिस पर पूरा जिला गर्व कर रहा है। तांतरी उत्तरी पंचायत के बेहद पिछड़े गांव से निकलकर श्वेता श्री ने अमेरिका के प्रतिष्ठित University of Illinois Urbana-Champaign से पीएचडी की उपाधि हासिल कर ली है।
बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पली-बढ़ी श्वेता आज कैंसर रिसर्च के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनकी यह उपलब्धि सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है।
गांव में नहीं थी बिजली, लेकिन सपनों में थी रोशनी
श्वेता श्री का बचपन बोकारो के कुम्हारडीह गांव में बीता, जहां लंबे समय तक बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभाव था।
लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया। उनकी दादी शकुंतला देवी, जो पंचायत में कन्या विद्यालय चलाती थीं, ने बचपन से ही उन्हें शिक्षा का महत्व समझाया।
परिवार के संस्कार और मेहनत के दम पर श्वेता ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आगे बढ़ती चली गईं।
BIT Mesra से गोल्ड मेडल, फिर अमेरिका में बनाई पहचान
उच्च शिक्षा के लिए श्वेता रांची स्थित BIT Mesra पहुंचीं, जहां उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी में स्नातक की पढ़ाई की और गोल्ड मेडल हासिल किया।
इसके बाद उन्हें छात्रवृत्ति मिली और उन्होंने अमेरिका के Texas A&M University से मास्टर्स किया। वहां भी उन्होंने यूनिवर्सिटी टॉपर बनकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
इसके बाद श्वेता ने शिकागो में रिसर्च शुरू की और University of Illinois Urbana-Champaign से मात्र चार वर्षों में पीएचडी पूरी कर ली।
कैंसर रिसर्च में किया महत्वपूर्ण शोध
श्वेता श्री का शोध विषय था —
“Molecular Mechanisms of Kerosphorby Signaling”
यह शोध शरीर की कोशिकाओं में होने वाले उन सूक्ष्म जैविक संकेतों को समझने पर आधारित है, जिनका संबंध कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से होता है।
उनके रिसर्च गाइड प्रोफेसर स्लाइगर अमेरिका के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं और नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज के सदस्य रह चुके हैं।
अब सपना — “कैंसर मुक्त भारत”
श्वेता श्री का अगला लक्ष्य फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री में काम कर कैंसर की सस्ती और सुलभ दवाएं विकसित करना है।
उनका कहना है कि इलाज पैसों की कमी के कारण किसी गरीब परिवार की पहुंच से बाहर नहीं होना चाहिए।
वह मानती हैं कि शिक्षा और रिसर्च का असली उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत पहुंचाना है।
पूरे बोकारो को बेटी पर गर्व
जिस गांव में कभी बेटियों की उच्च शिक्षा एक सपना मानी जाती थी, आज वहां बच्चे श्वेता श्री की कहानी सुनकर बड़े सपने देख रहे हैं।
कुम्हारडीह गांव से लेकर पूरे बोकारो जिले तक श्वेता की सफलता चर्चा का विषय बनी हुई है। उनकी उपलब्धि ने साबित कर दिया कि प्रतिभा और मेहनत के आगे अभाव भी हार मान लेते हैं।






