मनी लॉन्ड्रिंग और माइंस घोटाले में फंसे एमडी ने की कानूनी प्रक्रिया का पालन
राँची: उषा मार्टिन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) राजीव झंवर ने सोमवार को रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में अपना पासपोर्ट सरेंडर कर दिया। यह कदम उन्होंने विदेश यात्रा से लौटने के बाद उठाया, जिसके लिए उन्हें कोर्ट से अस्थायी रूप से पासपोर्ट वापसी की अनुमति मिली थी।
राजीव झंवर पर 190 करोड़ रुपये के आयरन ओर खनन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं। इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) दोनों कर रहे हैं। पहले सीबीआई ने घाटकुरी माइंस से संबंधित लीज उल्लंघन और अतिक्रमण की शिकायत पर मामला दर्ज किया था, जिसे बाद में ईडी ने 2 अक्टूबर 2021 को टेकओवर कर लिया।
कई अधिकारी आरोपी, चार्जशीट दायर
ईडी और सीबीआई की जांच के अनुसार, उषा मार्टिन ग्रुप ने कथित तौर पर लीज से अधिक मात्रा में आयरन ओर का अवैध खनन किया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान हुआ। इस केस में कंपनी के जीएम प्रमोद कुमार फतेपुरिया समेत कई अन्य अधिकारियों के नाम शामिल हैं।
गौरतलब है कि इस मामले में राजीव झंवर को सुप्रीम कोर्ट से अस्थायी राहत प्राप्त हुई थी, जिसके बाद वे विदेश यात्रा पर गए थे। यात्रा से लौटने के बाद उन्होंने कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए पासपोर्ट फिर से न्यायालय में जमा कर दिया।
निष्कर्ष
इस हाई-प्रोफाइल केस की अगली सुनवाई पर नजरें टिकी हैं, जहां जांच एजेंसियों की चार्जशीट और सबूतों पर बहस तेज हो सकती है। उषा मार्टिन केस झारखंड की सबसे बड़ी औद्योगिक अनियमितताओं में से एक माना जा रहा है।







