ग्रामीणों की सतर्कता और मुखिया की पहल से शारदा देवी सुरक्षित परिजनों तक पहुंचीं
पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत कादाजामदा पंचायत में मानवता और जागरूकता की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली। यहां दो दिनों से लापता 65 वर्षीय शारदा देवी को ग्रामीणों की सतर्कता और सहयोग से सकुशल उनके परिजनों तक पहुंचा दिया गया।
जानकारी के अनुसार, शारदा देवी ओडिशा के पानिकोइली से बस के जरिए नोवामुंडी लौट रही थीं, लेकिन बड़बिल बस स्टैंड पर उतरने के बाद किसी कारणवश अपने घर नहीं पहुंच सकीं। देर तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर परिजन चिंतित हो उठे और उनकी तलाश शुरू कर दी गई।
इसी बीच गांव के मुन्ना दास की नजर सड़क किनारे भटक रही एक वृद्ध महिला पर पड़ी। उन्होंने स्थिति को समझते हुए तुरंत पंचायत के मुखिया हीरा मोहन पुरती को इसकी सूचना दी। मुखिया ने तत्परता दिखाते हुए मामले को गंभीरता से लिया और महिला की पहचान सुनिश्चित कराने के प्रयास शुरू किए।
स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने और फोटो मिलान के बाद यह स्पष्ट हुआ कि महिला लापता शारदा देवी ही हैं। इसके बाद तुरंत उनके परिजनों को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य मौके पर पहुंचे और अपनी परिजन को सकुशल देखकर भावुक हो उठे।
इन दो दिनों के दौरान ग्रामीणों ने शारदा देवी की पूरी देखभाल की। उन्हें भोजन-पानी उपलब्ध कराया गया और सुरक्षित रखा गया। इस मानवीय पहल में कई ग्रामीणों ने मिलकर सहयोग किया, जिससे एक संभावित अनहोनी टल गई।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले इसी इलाके में अफवाह के कारण एक व्यक्ति के साथ मारपीट की घटना हुई थी। लेकिन इस बार ग्रामीणों ने समझदारी दिखाते हुए बिना किसी अफवाह पर ध्यान दिए सही कदम उठाया और एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया।
यह घटना न केवल एक परिवार के लिए राहत की खबर है, बल्कि समाज के लिए भी एक संदेश है कि जागरूकता, संवेदनशीलता और सहयोग से कई बड़ी घटनाओं को रोका जा सकता है। नोवामुंडी के ग्रामीणों ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है।







