जमील अख्तर पहले भी तीन हिंदू लड़कियों से कर चुका है निकाह, विश्व हिंदू परिषद ने जताई आपत्ति
बोकारो: जिले के सेक्टर 12 थाना क्षेत्र अंतर्गत लोहांचल कोऑपरेटिव कॉलोनी में कथित लव जिहाद का मामला प्रकाश में आया है, जहां भुवनेश्वर (उड़ीसा) से 6 महीने से लापता एक शादीशुदा युवती को एक युवक जमील अख्तर द्वारा छिपाकर रखने की बात सामने आई है।
युवती के पिता ज्योति रंजन नाथ राय के अनुसार, उनकी पुत्री पहले से विवाहिता है और जमील अख्तर नामक युवक उनके घर भी आता-जाता था। छह महीने पहले युवती अचानक गायब हो गई थी, जिस पर भुवनेश्वर थाने में मिसिंग रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। युवती की कॉल लोकेशन के आधार पर जब वे बोकारो पहुंचे और प्लॉट नंबर 161 (मकान मालिक: शशि भूषण) में पूछताछ की, तो शुरू में मकान मालिक ने इनकार किया, लेकिन बाद में युवती व युवक वहीं से बरामद किए गए।
जमील अख्तर पर आरोप है कि वह पहले भी तीन हिंदू लड़कियों से विवाह कर चुका है और फर्जी पहचान पत्र के सहारे हिंदू नाम बताकर वहां रह रहा था। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही विश्व हिंदू परिषद के स्थानीय पदाधिकारी संजीव कुमार, अन्य कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी।
विवाद के दौरान मकान मालिक का दुर्व्यवहार
इस दौरान मकान मालिक शशि भूषण द्वारा स्थानीय लोगों और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ कथित दुर्व्यवहार की शिकायत भी सामने आई है। लोगों का कहना है कि उन्होंने पहले युवक की मौजूदगी को नकारा और बाद में दबाव पड़ने पर स्वीकार किया।
पुलिस जांच और अगली कार्रवाई
युवती बालिग है, लेकिन पिता का कहना है कि उसका तलाक अब तक नहीं हुआ, इसलिए वह कानूनन विवाहित ही मानी जाएगी। मामले में अब तक कोई औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस ने दोनों पक्षों से पूछताछ शुरू कर दी है।
विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि यह स्पष्ट लव जिहाद का मामला है, और प्रशासन को इसमें सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, विशेषकर फर्जी दस्तावेज पर पहचान छिपाकर रहने को लेकर।
मामले से जुड़े प्रमुख बिंदु:
युवती बालिग है लेकिन विधिक रूप से विवाहित, इसलिए सहमति पर सवाल।
आरोपी युवक पर पूर्व में भी ऐसे ही संबंधों के आरोप।
फर्जी पहचान पत्र के आरोप, जिससे मकान किराए पर लिया गया।
स्थानीय संगठन और नागरिकों की सक्रियता से मामला सामने आया।
पुलिस जांच जारी, फिलहाल युवती की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
नोट:
यह मामला संवेदनशील है और पुलिस की जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाज़ी हो सकता है। ऐसी घटनाओं को लेकर साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखना जरूरी है, और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही कार्रवाई की जानी चाहिए।







