📢 पत्रकारों ने मांगा न्याय, झूठे मुकदमों पर रोक और प्रेस क्लब निर्माण की मांग
झारखंड के दुमका जिले में शनिवार को पत्रकारों ने पत्रकार उत्पीड़न के खिलाफ एकजुट होकर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। जिले के परिसदन भवन में आयोजित बैठक के बाद पत्रकारों ने समाहरणालय तक मार्च करते हुए डीसी अभिजीत सिन्हा को 7 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा।
पिछले कुछ महीनों में पत्रकारों पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए जाने की घटनाओं से पत्रकार समुदाय में गहरा रोष है। पत्रकारों का कहना है कि निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने पर उन्हें डराने-धमकाने और कानूनी शिकंजे में फंसाने की कोशिश हो रही है।
📝 बैठक में उठे प्रमुख मुद्दे
बैठक में जिले के प्रमुख मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकारों ने भाग लिया। बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई:
पत्रकारों पर झूठे मुकदमे दर्ज करने की घटनाओं पर तत्काल रोक लगे।
पत्रकारों की सुरक्षा के लिए स्थायी और सुदृढ़ व्यवस्था बनाई जाए।
सभी निराधार मुकदमे तुरंत प्रभाव से समाप्त किए जाएं।
प्रेस क्लब भवन का निर्माण शीघ्र शुरू किया जाए।
अस्थायी रूप से पत्रकारों के लिए वैकल्पिक भवन की व्यवस्था हो।
📍 डीसी को सौंपा गया 7 सूत्रीय मांग पत्र
मार्च के बाद समाहरणालय में उपायुक्त अभिजीत सिन्हा को जो मांग पत्र सौंपा गया, उसमें प्रमुख मांगें थीं:
1. पत्रकार उत्पीड़न रोकने के लिए सख्त प्रशासनिक कार्रवाई।
2. पत्रकारों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और कार्यनीति।
3. सभी झूठे और निराधार मुकदमों को वापस लिया जाए।
4. किसी भी पत्रकार पर FIR दर्ज करने से पहले DSP स्तर के अधिकारी द्वारा जांच।
5. झूठे मुकदमे दर्ज करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई।
6. प्रेस क्लब भवन का शीघ्र निर्माण।
7. वैकल्पिक भवन की तात्कालिक व्यवस्था।
🤝 डीसी का आश्वासन – पत्रकारों की मांगों पर होगा गंभीर विचार
डीसी अभिजीत सिन्हा ने पत्रकारों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका अहम है और उनकी सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया और कहा कि पत्रकारों की स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रशासन हर जरूरी कदम उठाएगा।
✊ लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की एकजुटता बनी मिसाल
दुमका का यह विरोध प्रदर्शन यह दर्शाता है कि अब पत्रकार समुदाय चुप नहीं बैठेगा। प्रेस की स्वतंत्रता पर किसी भी तरह के हमले का जवाब एकजुट होकर दिया जाएगा। यह लड़ाई केवल दुमका के पत्रकारों की नहीं, बल्कि पूरे देश के पत्रकारों और लोकतंत्र की आत्मा की है।
📌 निष्कर्ष:
दुमका में हुए इस विरोध प्रदर्शन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पत्रकारिता की गरिमा और सुरक्षा के लिए अब एक ठोस और निर्णायक कदम उठाया जाना जरूरी है।
🗞️ “पत्रकार सिर्फ खबर नहीं लिखते, वो लोकतंत्र की आत्मा को जीवित रखते हैं।”







