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शिक्षा सुधार की समीक्षा बैठक और दूसरी तरफ स्कूल में बच्चों से मजदूरी! आखिर जिम्मेदार कौन?

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उपायुक्त बोले- विद्यालयों को मॉडल संस्थान बनाएं, लेकिन प्रोजेक्ट गर्ल्स हाई स्कूल और एसबीएस मध्य विद्यालय चास में बच्चों से लगवाई जा रही झाड़ू

बोकारो | 19 मई 2026

एक तरफ बोकारो जिला प्रशासन सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था सुधारने और बच्चों को बेहतर माहौल देने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ जिले के ही एक सरकारी स्कूल से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है।

मंगलवार को अजय नाथ झा की अध्यक्षता में समाहरणालय में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बच्चों की उपस्थिति, आधारभूत सुविधाओं और बेहतर शैक्षणिक वातावरण पर जोर दिया गया।

“एक पंचायत और एक विद्यालय गोद लें” — उपायुक्त

समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने जिले के सभी वरीय अधिकारियों को एक पंचायत और एक विद्यालय गोद लेने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी नियमित रूप से स्कूलों का निरीक्षण करें और उन्हें मॉडल विद्यालय के रूप में विकसित करें।

उपायुक्त ने साफ कहा कि बच्चों को बेहतर शिक्षा, स्वच्छ परिसर और जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए। विद्यालयों में पेयजल, शौचालय, बिजली, साफ-सफाई और मध्याह्न भोजन व्यवस्था की भी नियमित मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया गया।

दूसरी तरफ स्कूल में बच्चों से कराया जा रहा “मजदूरी जैसा काम”

इसी बीच बोकारो जिले के प्रोजेक्ट गर्ल्स हाई School चास से बेहद गंभीर आरोप सामने आए हैं।

स्कूल के बच्चों ने आरोप लगाया है कि प्रभारी प्रधानाध्यापक बबलू दास उनसे पढ़ाई के बजाय मजदूरी जैसा काम करवाते हैं। बच्चों का कहना है कि उनसे रोज झाड़ू लगवाई जाती है, कचरा उठवाया जाता है और स्कूल की साफ-सफाई करवाई जाती है।

किताबों की बोरियां और बेंच भी ढुलवाने का आरोप

बच्चों के मुताबिक 23 अप्रैल को स्कूल में किताबों से भरी गाड़ी पहुंची थी। किताबों की भारी बोरियां बच्चों से उतरवाई गईं और स्कूल के अंदर पहुंचवाई गईं।

इतना ही नहीं, हाल ही में आए नए बेंच-डेस्क भी बच्चों से ऊपरी मंजिल तक चढ़वाए गए।

बच्चों ने आरोप लगाया कि जो छात्र काम करने से मना करते हैं, उन्हें टीसी देकर स्कूल से निकालने की धमकी दी जाती है।

सवालों के घेरे में शिक्षा व्यवस्था

अब बड़ा सवाल यह है कि जब जिला प्रशासन शिक्षा व्यवस्था सुधारने और स्कूलों को मॉडल संस्थान बनाने की बात कर रहा है, तब आखिर बच्चों से झाड़ू क्यों लगवाई जा रही है?

क्या सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे छात्र हैं या फिर मजदूर?

अगर बच्चों से भारी सामान ढुलवाने और सफाई करवाने जैसे आरोप सही हैं, तो इस मामले में अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

अभिभावकों में नाराजगी, जांच की मांग तेज

मामला सामने आने के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

अब देखना होगा कि शिक्षा व्यवस्था सुधारने के दावे करने वाला प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या कदम उठाता है।

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