मुख्य अतिथि अनुज कुमार सिन्हा ने बताया – जाति और धर्म से ऊपर उठकर सबको जोड़ा
बोकारो: जिला प्रशासन द्वारा बुधवार को बी.एस.सिटी कैंप टू स्थित जायका हैपनिंग्स सभागार में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दिशोम गुरू शिबू सोरेन के जीवन, संघर्ष, विचारधारा और विकास मॉडल पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रमुख वक्ता के रूप में प्रसिद्ध लेखक व चिंतक अनुज कुमार सिन्हा ने कहा कि दिशोम गुरू हमेशा जाति–धर्म से ऊपर उठकर समावेशी नेतृत्व करते थे। उन्होंने समाज को महाजनी प्रथा से मुक्त कराने का संकल्प लिया और आदिवासी समाज को सम्मान के साथ जीने का हक दिलाया।
उन्होंने धानकटनी आंदोलन, नशामुक्ति अभियान, पशुपालन, रात्रि पाठशालाओं और शिक्षा जागरूकता के माध्यम से आदिवासी समाज को आत्मनिर्भर बनाया।
डॉ. अभय सागर मिंज बोले – सांस्कृतिक चेतना और आत्मपहचान जरूरी
विशिष्ट अतिथि डॉ. अभय सागर मिंज, सहायक प्रोफेसर एवं निदेशक (अंतर्राष्ट्रीय लुप्तप्राय भाषा एवं संस्कृति प्रलेखन केंद्र, रांची विश्वविद्यालय), ने कहा कि दिशोम गुरू का 19 सूत्री विकास मॉडल आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने बताया कि आदिवासी केवल जंगल, पत्ता और नृत्य तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और जड़ों को जानकर ही वे विकास में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
उपायुक्त अजय नाथ झा ने किया बड़ा ऐलान
कार्यक्रम में उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि बोकारो जिले की सभी पंचायतों में रात्रि पाठशालाएं चलाई जाएंगी। साथ ही 24×7 दिवा–रात्रि पुस्तकालय की शुरुआत होगी, जहां विद्यार्थी पूरी रात पढ़ाई कर सकेंगे। जिलेभर में नशामुक्ति अभियान भी चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि झारखंड के विकास के लिए झारखंडी चेतना जरूरी है। इसी सोच को आगे बढ़ाना ही दिशोम गुरू को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
श्रद्धांजलि और करमा नृत्य के साथ समापन
संगोष्ठी की शुरुआत दिशोम गुरू शिबू सोरेन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने से हुई। कार्यक्रम के अंत में करमा पर्व के अवसर पर उपायुक्त अजय नाथ झा समेत अन्य अधिकारियों ने मांदर की थाप पर करमा नृत्य में भी भाग लिया।
संगोष्ठी का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि दिशोम गुरू की समावेशी सोच, सांस्कृतिक चेतना और झारखंडी विकास मॉडल को आगे बढ़ाना ही समाज की जिम्मेदारी है।








