सेक्टर-3E स्थित पर्यावरण-मित्र आश्रम में आयोजित कार्यक्रम, नीम, पीपल और बरगद समेत कई पौधों का वितरण
बोकारो | 28 जुलाई 2023
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के अवसर पर बोकारो के सेक्टर-3E स्थित “पर्यावरण-मित्र आश्रम” में स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान द्वारा वृक्ष वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत “वंदे प्रकृति मातरम्” के उद्घोष के साथ हुई। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।
प्रकृति की सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी : शशि भूषण ओझा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थान के महासचिव शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’ ने कहा कि प्रकृति से ही मानव जीवन संभव है और इसके साथ हो रही छेड़छाड़ भविष्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।
उन्होंने कहा कि वनों की अंधाधुंध कटाई, पहाड़ों का दोहन, नदियों में बढ़ता प्रदूषण और समुद्रों में फैल रहा कचरा पर्यावरणीय असंतुलन को बढ़ा रहा है। यही कारण है कि दुनिया प्राकृतिक आपदाओं और मौसम में असामान्य बदलाव का सामना कर रही है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति बचाना जरूरी
शशि भूषण ओझा ने कहा कि यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकटों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने सभी लोगों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की।
विभिन्न प्रजातियों के पौधों का किया गया वितरण
वृक्ष वितरण समारोह के दौरान नीम, बरगद, पीपल, स्वर्ण चंपा, अगस्त, सीता अशोक, कचनार और मौलश्री सहित कई उपयोगी एवं पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का वितरण किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।
पर्यावरण प्रेमियों की रही सहभागिता
इस अवसर पर संस्थान के महासचिव शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’ के अलावा अभय कुमार गोलू, मृणाल कांत चौबे, विजय गुप्ता, विष्णु शंकर मिश्र, ललित कुमार प्रसाद, भगवान पांडेय, योगेंद्र सिंह, रोहित सिंह, बबलू पांडेय, आर.एल. द्विवेदी, ज्ञानचंद जयसवाल, उत्तम गुरुंग, दिलदार ठाकुर, आनंदी बैठा सहित कई पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे।
निष्कर्ष
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने और हरियाली बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक पहल साबित हुआ। वृक्षारोपण और प्रकृति संरक्षण के माध्यम से पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का संदेश कार्यक्रम के केंद्र में रहा।




