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सावन में बोकारो के शिव मंदिर परिसर में हुआ रुद्राक्ष पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया गया संदेश

वन के पावन माह में स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान की पहल, रुद्राक्ष पौधे के माध्यम से प्रकृति और धर्म के महत्व को किया गया रेखांकित

बोकारो 

सावन में पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल

सावन के पवित्र महीने में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बोकारो के बीएसएल एलएच स्थित शिव मंदिर परिसर में रुद्राक्ष पौधे का रोपण किया गया। स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में शिव भक्तों और पर्यावरण प्रेमियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को वृक्षारोपण के प्रति जागरूक करना और प्रकृति संरक्षण का संदेश देना था।

जीवन के लिए पेड़ हैं अनिवार्य

संस्थान के महासचिव शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’ ने कहा कि जीवन के लिए ऑक्सीजन अत्यंत आवश्यक है और इसका प्रमुख स्रोत पेड़-पौधे हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लगातार हो रही पेड़ों की कटाई के कारण मौसम में असमय परिवर्तन देखने को मिल रहा है।

उन्होंने सभी लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी सुरक्षा का संकल्प लेने का आग्रह किया।

रुद्राक्ष का धार्मिक और औषधीय महत्व

संस्थान के उपाध्यक्ष पंडित अखिलेश ओझा ने कहा कि रुद्राक्ष का पौधा धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके साथ ही इसमें अनेक औषधीय गुण भी पाए जाते हैं, जो विभिन्न बीमारियों के उपचार में सहायक माने जाते हैं।

उन्होंने कहा कि रुद्राक्ष का पौधारोपण धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण दोनों का संदेश देता है।

शिव भक्तों और पर्यावरण प्रेमियों की रही भागीदारी

कार्यक्रम में लक्ष्मण शर्मा, दुर्गा सिंह, ललन सिंह, पंडित देवेंद्र भट्ट, सिंधु झा, प्रेम लता चौधरी, सुमांती देवी, शीला देवी, बच्ची देवी, नागेंद्र सिंह, संतोष कुमार, परशुराम राय, पान मुहम्मद, नारायण पांडेय, रंजित तिवारी सहित बड़ी संख्या में शिव भक्त और पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे।

सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से पौधों की रक्षा करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

निष्कर्ष

सावन माह में आयोजित यह रुद्राक्ष पौधारोपण कार्यक्रम धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संगम साबित हुआ। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि प्रकृति की रक्षा और वृक्षारोपण केवल सामाजिक जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भी आवश्यक है।

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