बोकारो स्टील प्लांट में ठेका मजदूरों की संभावित छंटनी के खिलाफ तेज हुआ आंदोलन
बोकारो स्टील प्लांट में ठेका मजदूरों की संभावित छंटनी के खिलाफ विरोध लगातार तेज हो रहा है। जय झारखंड मजदूर समाज द्वारा चलाए जा रहे जनजागरण अभियान के तहत कोक ओवेन एंड कोक केमिकल विभाग में सभा आयोजित की गई।
सभा को संबोधित करते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सदस्य सह जय झारखंड मजदूर समाज के महामंत्री बी.के. चौधरी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला।
“यह बिशाखापतनम नहीं, बोकारो है”
बी.के. चौधरी ने कहा कि बोकारो भगवान बिरसा मुंडा और सिद्धू-कान्हू की संघर्ष भूमि है।
उन्होंने कहा कि यहां के लोगों ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और झारखंड आंदोलन के जरिए अलग राज्य हासिल किया। इसलिए मजदूरों के अधिकारों पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्थानीय मजदूरों के रोजगार पर संकट
चौधरी ने दावा किया कि बोकारो स्टील प्लांट में कार्यरत अधिकांश ठेका मजदूर स्थानीय मूलवासी और विस्थापित परिवारों से आते हैं।
इन परिवारों ने प्लांट निर्माण के लिए अपनी जमीन दी थी। अब उन्हीं परिवारों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है।
मजदूरों में बढ़ रही चिंता
उन्होंने कहा कि मजदूर पहले से कम वेतन और आर्थिक शोषण का सामना कर रहे हैं।
अब 40 प्रतिशत कर्मचारियों को हटाने की चर्चा से मजदूरों और अधिकारियों दोनों में चिंता का माहौल है। इसका असर उत्पादन पर भी पड़ रहा है।
निजी कंपनियों से तुलना पर सवाल
बी.के. चौधरी ने कहा कि सरकार बोकारो स्टील की तुलना निजी कंपनियों से कर रही है।
उन्होंने कहा कि यह प्लांट केवल मुनाफा कमाने के लिए नहीं, बल्कि रोजगार और क्षेत्रीय विकास के उद्देश्य से बनाया गया था।
12 मई को ‘हल्लाबोल’ कार्यक्रम
सभा के अंत में मजदूरों से 12 मई 2026 को दोपहर 12:30 बजे प्लांट गोलचक्कर में आयोजित “हल्लाबोल” कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की गई।
नेताओं ने मजदूरों से एकजुट होकर अपनी ताकत दिखाने का आह्वान किया।
Conclusion
बोकारो स्टील प्लांट में संभावित छंटनी को लेकर मजदूर संगठनों का विरोध लगातार बढ़ रहा है।
जय झारखंड मजदूर समाज ने साफ संकेत दिया है कि मजदूरों के रोजगार और अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।







