राम मंदिर से जगन्नाथ मंदिर तक निकली भव्य रथयात्रा, हजारों श्रद्धालुओं ने खींचा रथ; मार्ग में पेयजल और शरबत सेवा की गई।
बोकारो | 25 जुलाई 2026 : बोकारो इस्पात नगर में भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा यात्रा (वापसी रथयात्रा) श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ संपन्न हुई। भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भ्राता बलभद्र की सुसज्जित रथयात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे मार्ग में धार्मिक उल्लास के बीच सेवा शिविरों में श्रद्धालुओं के लिए पेयजल और शरबत की व्यवस्था की गई।
भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुई भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा यात्रा
बोकारो इस्पात नगर में भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा एवं भ्राता बलभद्र की बाहुड़ा यात्रा (वापसी यात्रा) श्रद्धा एवं भक्ति के माहौल में संपन्न हुई। विधिवत पूजा-अर्चना के बाद देव प्रतिमाओं को मंदिर प्रांगण से बाहर लाकर आकर्षक ढंग से सजे रथ पर विराजमान किया गया।
छेरा-पन्हारा की परंपरा का हुआ निर्वहन
यात्रा शुरू होने से पहले परंपरा के अनुसार अधिशासी निदेशक (सामग्री प्रबंधन) ने छेरा-पन्हारा की रस्म पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ निभाई। इस अवसर पर बोकारो महिला समिति की सदस्याएं, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
राम मंदिर से जगन्नाथ मंदिर तक निकली भव्य रथयात्रा
बाहुड़ा यात्रा जनवृत्त-1 स्थित राम मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर पत्थरकट्टा चौक, गांधी चौक (सिटी सेंटर), बोकारो जनरल अस्पताल मार्ग से होते हुए जगन्नाथ मंदिर पहुंची। श्रद्धालुओं ने पूरे मार्ग में भक्तिभाव के साथ रथ खींचकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।
श्रद्धालुओं के लिए सेवा शिविरों की रही विशेष व्यवस्था
यात्रा मार्ग पर विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं, बोकारो महिला समिति और सामाजिक संगठनों ने श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, शीतल शरबत और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की। इस सेवा कार्य ने धार्मिक आयोजन को और अधिक सफल एवं व्यवस्थित बनाया।
सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का संदेश
बोकारो इस्पात संयंत्र द्वारा आयोजित यह धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन नगर में सामुदायिक सहभागिता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बना। बाहुड़ा यात्रा ने श्रद्धा, सेवा और भाईचारे का संदेश भी दिया।




