UNICEF समेत कई संस्थाओं के प्रयास से संभव हुआ मिलन, घर में लौटी खुशियां
बोकारो: कभी उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी, लेकिन एक मां की दुआ और कई संस्थाओं के अथक प्रयासों ने आखिरकार चमत्कार कर दिया। करीब 4 साल से लापता गुरवा जब अपने घर लौटा, तो पूरे परिवार की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। घर का माहौल किसी त्योहार से कम नहीं था।
🏠 बालगृह से घर तक का सफर
गुरवा पिछले कई वर्षों से चास स्थित सहयोग विलेज के बालगृह में रह रहा था। वर्ष 2022 में वह पिंड्राजोरा क्षेत्र में भटकते हुए मिला था, जिसके बाद ग्रामीणों ने उसे पुलिस को सौंप दिया। आवश्यक प्रक्रिया के बाद उसे बाल कल्याण समिति के निर्देश पर बालगृह में रखा गया।
🧠 मानसिक स्थिति बनी चुनौती
गुरवा मानसिक रूप से कमजोर था और अपने परिवार के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाता था। यही वजह थी कि उसकी पहचान और घर का पता लगाना काफी मुश्किल हो गया। इस दौरान उसका इलाज लगातार जारी रहा, जिससे धीरे-धीरे उसकी स्थिति में सुधार हुआ।
🔍 आधार से मिला सुराग
कई बार आधार कार्ड बनाने की कोशिश नाकाम रही, लेकिन बाद में पता चला कि उसका आधार पहले से बना हुआ है। UNICEF और सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स, NUSRL के सहयोग से उसकी पहचान से जुड़ी जानकारी हासिल की गई, जिससे उसके घर का पता चल सका।
📰 हर स्तर पर हुई कोशिश
जिला बाल संरक्षण इकाई ने भी लगातार प्रयास जारी रखे। अखबारों में सूचना प्रकाशित की गई, ऑनलाइन पोर्टल पर जानकारी साझा की गई और हर संभव माध्यम अपनाया गया। आखिरकार मेहनत रंग लाई और गुरवा को उसके परिवार से मिला दिया गया।
👩👦 मां की जुबानी दर्द और खुशी
गुरवा की मां ने भावुक होकर कहा, “वो बारात गया था और लौटते समय कहीं खो गया। हमें लगा अब शायद कभी नहीं मिलेगा… लेकिन आज वो हमारे सामने है, इससे बड़ी खुशी कोई नहीं हो सकती।”
🌟 उम्मीद की जीत
बाल कल्याण समिति, बोकारो की अध्यक्ष श्रीमती लीलावती देवी ने इसे उम्मीद, धैर्य और निरंतर प्रयासों की जीत बताया। यह कहानी दिखाती है कि सच्ची कोशिशें कभी बेकार नहीं जातीं।
👉 यह सिर्फ एक बच्चे की घर वापसी नहीं, बल्कि इंसानियत, सिस्टम और मां के विश्वास की जीत की कहानी है।







