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बोकारो में स्वदेशी आंदोलन के प्रथम बलिदानी बाबू गेनू को श्रद्धांजलि

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स्वदेशी आंदोलन के प्रथम बलिदानी बाबू गेनू को बोकारो में श्रद्धांजलि, स्वदेशी जागरण मंच ने किया आयोजन

बोकारो: बीसवीं सदी के प्रारंभिक वर्षों में जब भारत अंग्रेज़ी शासन के दमन का सामना कर रहा था, तब मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) के एक सामान्य मजदूर ने अपनी वीरता और देशभक्ति से इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। उनका नाम था बाबू गेनू, जिन्होंने विदेशी वस्त्रों के आयात के विरोध में अपने प्राणों की आहुति दी।
उपरोक्त विचार स्वदेशी जागरण मंच के क्षेत्रीय संयोजक अमरेंद्र कुमार सिंह ने नया मोड़ स्थित बिरसा चौक पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में व्यक्त किए।

“बाबू गेनू स्वदेशी आंदोलन का अमर प्रतीक हैं” – अमरेंद्र कुमार सिंह

उन्होंने कहा कि बाबू गेनू का नाम भले ही इतिहास के पन्नों में अपेक्षित स्थान नहीं पा सका, लेकिन उनका बलिदान उन्हें स्वदेशी आंदोलन का अमर नायक बनाता है। उन्होंने ब्रिटिश आर्थिक शोषण के खिलाफ आवाज उठाई और देशवासियों को स्वदेशी वस्त्र एवं उत्पाद अपनाने के लिए प्रेरित किया।

1930 में हुई ऐतिहासिक घटना ने बदल दी आंदोलन की दिशा

मंच के सह प्रांत मेला सह प्रमुख अजय सिंह ने बताया कि ब्रिटिश शासन भारतीय उद्योगों को कमजोर करने के लिए विदेशी कपड़े का बड़े पैमाने पर आयात करता था। इसी के विरोध में 12 दिसंबर 1930 को बाबू गेनू ने एक ट्रक (लोरी) को रोकने का प्रयास किया, जो बंबई पोर्ट से विदेशी कपड़े बाजारों की ओर ले जा रहा था।

शांतिपूर्ण विरोध के दौरान ब्रिटिश पुलिस ने लाठीचार्ज और फायरिंग की। संघर्ष के बीच लोरी से कुचलकर बाबू गेनू शहीद हो गए। उनका बलिदान स्वदेशी आंदोलन की प्रेरक शक्ति बन गया।

हर वर्ष 12 दिसंबर को मनाया जाता है स्वदेशी दिवस

अजय सिंह ने कहा कि स्वदेशी जागरण मंच द्वारा बाबू गेनू की पुण्यतिथि ‘स्वदेशी दिवस’ के रूप में मनाई जाती है। यह दिवस केवल उनके शौर्य का स्मरण नहीं, बल्कि देशी उत्पादों के उपयोग और विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार के संकल्प का प्रतीक है।

“आर्थिक स्वतंत्रता भी उतनी ही महत्वपूर्ण” – अजय चौधरी दीपक

मंच के प्रांत संपर्क प्रमुख अजय कुमार चौधरी दीपक ने कहा कि बाबू गेनू का योगदान बताता है कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक स्वतंत्रता भी उतनी ही जरूरी थी। उनकी शहादत ने मजदूरों, छात्रों और आम नागरिकों को अपने अधिकारों के लिए खड़े होने का साहस दिया।

उन्होंने कहा कि बाबू गेनू को याद करना आत्मनिर्भरता, स्वदेशी उत्पादों के महत्व और भारतीय उद्योगों के समर्थन की भावना को मजबूत करता है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित

नया मोड़ के बिरसा चौक पर आयोजित कार्यक्रम में अमर शहीद बाबू गेनू को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
इस अवसर पर क्षेत्रीय संयोजक अमरेंद्र सिंह, प्रांत संपर्क प्रमुख अजय कुमार चौधरी, सह मेला प्रमुख अजय कुमार सिंह, जयशंकर प्रसाद, विनोद चौधरी, राकेश रंजन, नवीन कुमार सिंह, रजनीकांत कुमार सिंह, विवेकानंद झा, मनीष कुमार श्रीवास्तव, सुनीता श्रीवास्तव, पुष्पा मिश्रा, कुमार संजय, ए.के. सिंह, अमरिंदर सिंह, प्रेम प्रकाश, सुजीत कुमार समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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Suresh Choudhary
Suresh Choudharyhttp://cityhulchul.in
City Hulchul News के बोकारो संवाददाता। जनहित, अपराध और सामाजिक मुद्दों की निष्पक्ष रिपोर्टिंग में सक्रिय।
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