रानीचिड़का गांव में पेयजल संकट खत्म, महिलाओं को अब नहीं जाना पड़ेगा 3 किलोमीटर दूर नदी तक
चास, बोकारो : 31 मई 2026
बोकारो जिले के चास प्रखंड अंतर्गत रानीचिड़का गांव में पिछले लगभग एक वर्ष से बंद पड़े सोलर जलमीनार को जिला प्रशासन की त्वरित पहल से पुनः चालू कर दिया गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायत पर उपायुक्त (डीसी) अजय नाथ झा ने तत्काल संज्ञान लेते हुए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को कार्रवाई का निर्देश दिया।
सोशल मीडिया शिकायत पर तुरंत हरकत में आया प्रशासन
ग्रामीणों ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया था कि गांव का सोलर जलमीनार करीब एक साल से खराब पड़ा है। इसके कारण गांव में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो गया था और महिलाओं को पीने का पानी लाने के लिए लगभग तीन किलोमीटर दूर नदी तक जाना पड़ रहा था।
शिकायत मिलते ही उपायुक्त ने संबंधित विभाग को समस्या के समाधान के लिए तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
कार्यपालक अभियंता स्वयं पहुंचे गांव
डीसी के निर्देश के बाद पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, चास प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता राम प्रवेश राम स्वयं रानीचिड़का गांव पहुंचे। उन्होंने सोलर जलमीनार का निरीक्षण कर तकनीकी खराबी की जांच की और विभागीय टीम के सहयोग से आवश्यक मरम्मत कार्य कराया।
मरम्मत के बाद बहाल हुई पेयजल आपूर्ति
विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए जलमीनार की तकनीकी खराबी को दूर किया गया। मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद सोलर जलमीनार पुनः चालू हो गया और गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति बहाल हो गई।
जलमीनार के संचालन शुरू होने से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।
ग्रामीणों ने जताया आभार
समस्या के समाधान के बाद ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग का आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना है कि जलमीनार बंद होने से विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से उनकी लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान हो गया।
शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध
जिला प्रशासन ने कहा कि आमजन सोशल मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों से अपनी समस्याएं प्रशासन तक पहुंचा सकते हैं। प्राप्त शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेकर समाधान सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है।
निष्कर्ष
रानीचिड़का गांव में एक साल से बंद सोलर जलमीनार का चालू होना प्रशासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्यशैली का उदाहरण है। सोशल मीडिया पर उठाई गई एक शिकायत के समाधान से सैकड़ों ग्रामीणों को राहत मिली है और पेयजल संकट का अंत हुआ है।




