खेत की खुदाई में निकली मां चामुंडा की प्राचीन प्रतिमा, ग्रामीणों में श्रद्धा और उल्लास का माहौल
साहेबगंज: बरहरवा प्रखंड के बेलडांगा कमालपुर गांव में एक खेत की खुदाई के दौरान देवी दुर्गा के उग्र रूप मां चामुंडा की एक प्राचीन पत्थर की प्रतिमा मिलने से पूरे इलाके में धार्मिक उत्साह और आस्था का माहौल बन गया है। यह घटना मजदूर नयन रजवाड़ के खेत में हुई जब उनकी कुदाल किसी कठोर वस्तु से टकराई।
ग्रामीणों ने मिलकर निकाली मूर्ति, शुरू हुई पूजा-अर्चना
नयन रजवाड़ ने तत्काल ग्रामीणों को बुलाया और सभी ने मिलकर मिट्टी हटाकर प्रतिमा को बाहर निकाला। प्रतिमा बाहर आते ही गांव में पूजा-अर्चना शुरू हो गई और देखते ही देखते श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट गई। ग्रामीण इसे देवी का चमत्कारी प्रकट रूप मान रहे हैं।
प्रतिमा की बनावट और मुद्रा से मां चामुंडा की पुष्टि
यह पत्थर से निर्मित मूर्ति देवी दुर्गा के उग्र रूप मां चामुंडा की शैली और मुद्रा से मेल खाती है। मूर्ति की भाव-भंगिमा और कलात्मकता विशेषज्ञों को पाल वंश (10वीं शताब्दी) की याद दिलाती है। स्थानीय जानकारों के अनुसार, यह मूर्ति पुरातात्विक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्राचीन विरासत से जुड़ा एक नया अध्याय
साहेबगंज जिले के लिए यह खोज न केवल धार्मिक रूप से, बल्कि इतिहास और पुरातत्व की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र पालकालीन सभ्यता से जुड़ा हो सकता है, और आगे की खुदाई से और भी महत्वपूर्ण अवशेष मिलने की संभावना है।
प्रशासन और पुरातत्व विभाग से जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और पुरातत्व विभाग से प्रतिमा का परीक्षण कराने और इलाके को संरक्षित धार्मिक स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की है। ग्रामीण चाहते हैं कि मूर्ति को यथास्थान मंदिर रूप में सुरक्षित किया जाए।
नयन रजवाड़ को मान रहे हैं सौभाग्यशाली
प्रतिमा खोजने वाले नयन रजवाड़ को लोग देवी का कृपापात्र मान रहे हैं। उन्हें गांव में विशेष सम्मान दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने मूर्ति की विधिवत पूजा कर मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।
सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से अहम खोज
इस खोज से यह स्पष्ट होता है कि साहेबगंज और उसके आसपास के इलाके प्राचीन काल से ही सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से समृद्ध रहे हैं। विशेषज्ञों की टीम द्वारा विस्तृत अध्ययन और संरक्षण से यह स्थान झारखंड की धार्मिक विरासत का प्रमुख केंद्र बन सकता है।







