सिमडेगा: बानो प्रखंड में गर्भवती महिला को खाट पर लिटाकर पार कराई गई नदी, सड़क-स्वास्थ्य सेवा गायब
झारखंड के सिमडेगा जिले का बानो प्रखंड, जो 16 पंचायतों और 93 राजस्व ग्रामों के साथ जिला का सबसे बड़ा प्रखंड है, आज भी बुनियादी विकास से कोसों दूर है। इस क्षेत्र की राजनीतिक और प्रशासनिक उपेक्षा का ताजा उदाहरण गेनमेरे पंचायत के टोनिया कर्रादमार गांव में एक गर्भवती महिला को खाट पर लादकर नदी पार कर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना बना।
पांगुर गांव के निवासी राजेश पाइक की पत्नी हेमंती देवी को रात 3 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। भारी बारिश के चलते पांगुर नदी में जलस्तर बढ़ गया था, जिससे गांव से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। बिजली नहीं होने और मोबाइल नेटवर्क ठप रहने के कारण एंबुलेंस बुलाना भी संभव नहीं था।
समाजसेवी ने निभाई बड़ी भूमिका
समाजसेवी सहदेव कोटवार ने बताया कि गांव में पिछले चार दिनों से बिजली नहीं है और मोबाइल टावर की सुविधा न होने से संचार पूरी तरह बाधित है। उन्होंने बताया, “हम लोग जामुड़सोया गांव के भुनेश्वर पाइक के टेम्पु का इस्तेमाल करते हैं ताकि आपात स्थिति में मरीज को नदी पार कर स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जा सके।”
ग्रामीणों की मदद से हेमंती देवी को खाट पर लिटा कर पांगुर नदी पार कर भुनेश्वर पाइक के टेम्पु तक पहुंचाया गया। वहां से सुबह करीब 7 बजे हुरदा स्थित स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
मां और बच्चे की जान बची
सीएचसी हुरदा के प्रभारी डॉ. मनोरंजन कुमार ने जानकारी दी कि अस्पताल में हेमंती देवी का सुरक्षित प्रसव हुआ और मां-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद सुरक्षित घर भेज दिया गया।
क्या कहता है यह मामला?
इस घटना ने एक बार फिर बानो प्रखंड की दुर्दशा को उजागर किया है, जहां आज भी बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, बिजली, नेटवर्क और स्वास्थ्य सेवा का घोर अभाव है। यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण है, बल्कि राज्य के अंदरूनी इलाकों की जमीनी हकीकत को भी दर्शाता है।
निष्कर्ष:
सरकार और प्रशासन को चाहिए कि बानो जैसे उपेक्षित प्रखंडों में आधारभूत ढांचे को प्राथमिकता दे, ताकि अगली बार किसी को खाट पर लादकर जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की नौबत न आए।








