कल्पतरु महोत्सव के दूसरे दिन ब्रह्मा स्वरूप देववृक्ष की हुई वैदिक पूजा
बोकारो: तीन दिवसीय ‘मनोकामनासिद्धि देववृक्ष कल्पतरु महोत्सव’ के दूसरे दिन, श्रावण शुक्ल द्वादशी तिथि को पर्यावरण मित्र वाटिका, बोकारो में स्थित देववृक्ष कल्पतरु के तने में भगवान ब्रह्मा की वैदिक विधि से पूजा की गई। यह आयोजन प्रातः 07 बजे से शुरू हुआ, जिसमें स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान के पर्यावरण प्रहरियों ने भाग लिया।
पूजन के दौरान देश, राज्य एवं बोकारोवासियों के कल्याण और सर्वांगीण विकास के लिए विशेष प्रार्थनाएं की गईं। वैदिक पूजा का संचालन संस्थान के उपाध्यक्ष पं. अखिलेश ओझा ने मंत्रोच्चार के साथ किया। उन्होंने बताया कि देववृक्ष कल्पतरु समुद्र मंथन से प्राप्त चौदह रत्नों में से एक है और यह मनोकामनासिद्धि का प्रतीक है।
संस्थान के पदाधिकारियों की रही विशेष उपस्थिति
पूजन समारोह में संस्थान के अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार पांडेय, कार्यकारी अध्यक्ष रघुवर प्रसाद, महासचिव शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’, सहसचिव विजय त्रिपाठी, नशामुक्ति प्रकोष्ठ संयोजक लक्ष्मण शर्मा, वृक्षारोपण प्रकोष्ठ संयोजक वीरेंद्र चौबे, एवं सक्रिय सदस्य अर्जुन पांडेय प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
महोत्सव का अंतिम दिन: भगवान शिव की पूजा और रुद्र अष्टाध्यायी पाठ
7 अगस्त 2025 को प्रातः 07 बजे, महोत्सव के तीसरे एवं अंतिम दिन, देववृक्ष कल्पतरु की शाखाओं में देवाधिदेव भगवान शिव की पूजा एवं जलाभिषेक किया जाएगा। इस अवसर पर रुद्र अष्टाध्यायी के मंत्रों द्वारा शिव स्वरूप कल्पतरु को अभिषिक्त किया जाएगा।







