स्वास्थ्य विभाग ने लिया कड़ा एक्शन, बिना योगदान वाले डॉक्टरों की सेवा समाप्त
रांची: झारखंड सरकार ने एक अहम और सख्त फैसला लेते हुए 143 डॉक्टरों की सेवा समाप्त कर दी है। इन डॉक्टरों को 2020 और 2023 में जारी जेपीएससी (झारखंड लोक सेवा आयोग) के विज्ञापन के आधार पर नियुक्त किया गया था। इन्हें विभिन्न सरकारी अस्पतालों में पदस्थापित किया गया था, लेकिन इनमें से किसी ने भी अपने पद पर योगदान नहीं दिया।
सरकारी रिकॉर्ड में इन डॉक्टरों की तैनाती दर्शाई गई थी, जिससे यह भ्रम पैदा हो रहा था कि अस्पतालों में डॉक्टर उपलब्ध हैं। लेकिन वास्तव में न तो मरीजों को सेवाएं मिल रही थीं और न ही अस्पतालों की कार्यक्षमता में सुधार हो पा रहा था। स्वास्थ्य सेवा बाधित हो रही थी और ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर और भी गहरा था।
मुख्यमंत्री की सहमति के बाद इस मामले की जांच की गई और सेवा अनुशासन के तहत इन सभी डॉक्टरों की सेवा समाप्त कर दी गई।
57 स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की सेवा समाप्त
सेवा समाप्त किए गए 57 विशेषज्ञ डॉक्टरों में कई प्रमुख नाम शामिल हैं, जिनमें सूर्य कुमार, रोमा प्रसाद, नौशाद आलम, शहदाब असफी, नीलू सिंह, रंजीत गुप्ता, अरविंद कुमार, मो. जुनैद, नितिश कुमार, मनीष कुमार, राकेश रंजन, श्यामानंद सिंह, अर्पणा सरदार, एश्तेशामुल हसन, अभिषेक जायसवाल, ममता एन कुजूर, और प्रेरणा सिंह जैसे नाम प्रमुख हैं।
86 सामान्य डॉक्टरों की सेवा समाप्त
सेवा समाप्त किए गए सामान्य चिकित्सकों की सूची भी काफी लंबी है, जिसमें सरिता तिग्गा, उत्तम कुमार, नौशीन सादा, सौम्या पात्रा, अभिमन्यु साकेत, निधि रंजन, कृति किरण, आयुष पांडेय, खुशबू चौरसिया, देवप्रिया घोष, अतहर रजा, एश्वर्या दांडपत, अर्चित कुमार, शिवम गुप्ता, ऋतिक झा, नंदिनी चौधरी, प्रियंका हेरेंज, और आयुष प्रसाद जैसे नाम शामिल हैं।
सरकार का स्पष्ट संदेश: सेवा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
स्वास्थ्य विभाग के इस कदम को राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि नियुक्ति के बाद योगदान न देने वाले कर्मियों के प्रति अब सख्ती बरती जाएगी। यह निर्णय राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने और जनता को वास्तविक सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया है।







