आस्था, इतिहास और कला का प्रतीक यह प्राचीन मंदिर संरक्षण के अभाव में धीरे-धीरे हो रहा है विलुप्त
पटना, बिहार: जहां एक ओर श्रावणी मेला को लेकर पूरे राज्य में शिवालयों को सजाया-संवारा जा रहा है, वहीं सारण जिले के सोनपुर स्थित प्राचीन लिंगोद्भूत उमा महेश्वर मंदिर उपेक्षा का दंश झेल रहा है। यह ऐतिहासिक मंदिर हरिहरनाथ-पूर्व कांवरिया पथ के नजदीक स्थित है, लेकिन संरक्षण के अभाव में इसकी स्थिति जर्जर हो चुकी है।
इस मंदिर के गुंबद पर चार दिशाओं में श्रीकृष्ण, गणेश, हनुमान और एक नाथपंथी योगी की उकेरी गई मूर्तियां इसकी ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाती हैं। मान्यता है कि ये चार दिक्पाल वर्षों से हरिहरक्षेत्र की रक्षा कर रहे हैं। परंतु आज यह मंदिर झाड़ियों, पेड़-पौधों और अतिक्रमण की चपेट में आ चुका है।
मुख्य मंदिर के साथ-साथ परिसर में मौजूद कई छोटे मंदिर और समाधियाँ या तो टूट चुकी हैं या लंबे समय से उपेक्षित हैं। बताया जाता है कि मुख्य शिवलिंग की चोरी का भी प्रयास 15 वर्ष पहले हुआ था, जिसमें मूर्ति को क्षतिग्रस्त करने की कोशिश की गई थी।
यह मंदिर बाला नाथ संत परंपरा से जुड़ा हुआ है और यहां कई सिद्ध योगियों की समाधियाँ हैं, जिन पर शिवलिंग स्थापित हैं। मंदिर का प्रमुख आकर्षण लिंगोद्भूत शिवलिंग है, जिसमें देवी का मुख स्पष्ट रूप से उकेरा गया है—यह इसे अद्वितीय बनाता है।
मंदिर के गर्भगृह की दीवारों पर नागकन्याओं और मोर जैसे चित्र आज भी मौजूद हैं, परन्तु देखरेख के अभाव में ये कलाकृतियां धुंधली पड़ गई हैं।
दुख की बात है कि न तो स्थानीय ग्रामीण, न ही बिहार धार्मिक न्यास पर्षद और न ही बिहार पर्यटन विभाग इस धरोहर के संरक्षण के लिए सामने आए हैं।
अब प्रश्न यह उठता है—क्या यह आस्था की अमूल्य विरासत इसी तरह मिटा दी जाएगी, या कोई पहल इसे पुनर्जीवित कर पाएगी?








