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HomeNEWSBOKAROडीपीएस बोकारो में किशोरवय शिक्षा पर दो दिवसीय शिक्षक कार्यशाला संपन्न

डीपीएस बोकारो में किशोरवय शिक्षा पर दो दिवसीय शिक्षक कार्यशाला संपन्न

नई शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षकों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न

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बोकारो: नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत शिक्षकों को किशोरवय शिक्षा के प्रति अधिक जागरूक और सक्षम बनाने हेतु डीपीएस बोकारो में आयोजित दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का समापन शुक्रवार को हुआ।
यह कार्यशाला सीबीएसई पटना के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) के तत्वावधान में आयोजित की गई, जिसमें विद्यालय के करीब 60 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भाग लिया।


🎓 किशोरवय शिक्षा पर विशेषज्ञों ने दी गहन जानकारी

इस कार्यशाला की रिसोर्स पर्सन थीं:

  • पी. शैलजा जयकुमार, प्राचार्या, श्री अय्यप्पा पब्लिक स्कूल

  • चंदा कुमारी, वरिष्ठ शिक्षिका, एमजीएम हायर सेकेंडरी स्कूल

इन्होंने किशोरावस्था की मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और शैक्षणिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।
शिक्षकों को बताया गया कि 10 से 19 वर्ष की आयु किशोरावस्था की श्रेणी में आती है, जो तेजी से विकास और भावनात्मक परिवर्तन का समय होता है।


🕯️ वैदिक मंत्रोच्चार से हुआ शुभारंभ

कार्यशाला का उद्घाटन विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने दोनों रिसोर्स पर्सन के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
संगीत शिक्षकों ने ‘गाइए गणपति जग वंदन…’ भजन की प्रस्तुति से कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

अपने संबोधन में डॉ. गंगवार ने कहा,

किशोरावस्था एक संवेदनशील चरण है, जिसमें शिक्षक की भूमिका मार्गदर्शक के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।”


📊 गतिविधियों के माध्यम से शिक्षकों को किया प्रशिक्षित

दोनों दिनों में शिक्षकों को सैद्धांतिक ज्ञान और व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
अलग-अलग समूहों में शिक्षकों को बांटकर उन्हें निम्न विषयों पर सक्रिय गतिविधियों में भाग लेने को कहा गया:

  • किशोरों की पहचान और भावनात्मक स्थिति

  • सोशल मीडिया और लत का प्रभाव

  • लिंग आधारित पूर्वाग्रह और भेदभाव

  • नशा एवं दुरुपयोग से बचाव

  • जीवन कौशल विकास

शिक्षकों ने अपने विचार और अनुभव साझा किए, जिससे कार्यशाला का वातावरण अत्यंत संवादात्मक और व्यावहारिक रहा।


📌 कार्यशाला का महत्व और निष्कर्ष

कार्यशाला के अंतिम दिन मूल्यांकन, ओपन डिस्कशन और फीडबैक सेशन का आयोजन हुआ।
रिसोर्स पर्सन ने यह स्पष्ट किया कि शिक्षकों को किशोरों के मनोविज्ञान को समझते हुए, उन्हें सकारात्मक दिशा में मार्गदर्शन देना होगा।
यह कार्यशाला न केवल ज्ञानवर्धक रही, बल्कि शिक्षकों के लिए प्रेरणादायक अनुभव भी बनी।

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Suresh Choudhary
Suresh Choudharyhttp://cityhulchul.in
City Hulchul News के बोकारो संवाददाता। जनहित, अपराध और सामाजिक मुद्दों की निष्पक्ष रिपोर्टिंग में सक्रिय।
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