100 एकड़ वन भूमि घोटाले में सीआईडी की बड़ी कार्रवाई, दो गिरफ्तार
बोकारो: बोकारो जिले के तेतुलिया मौजा स्थित करीब 100 एकड़ से अधिक वन भूमि की अवैध खरीद-बिक्री मामले में सीआईडी (CID) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपियों — इजहार हुसैन और अख्तर हुसैन — को गिरफ्तार किया है। इन दोनों पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी जमीन को कब्जा करने और उसे बेचने का आरोप है।
मामला बेहद गंभीर है क्योंकि यह वही भूमि है जिसे पहले बोकारो स्टील प्लांट (BSP) ने वन विभाग को वापस लौटाया था। अब इस भूमि पर फर्जीवाड़ा कर उसे प्राइवेट हस्तियों को बेचा जा रहा था।
सीआईडी और ईडी कर रहे हैं संयुक्त जांच
मामले की जांच झारखंड सरकार के निर्देश पर सीआईडी को सौंपी गई थी। इसके साथ ही ईडी (ED) भी आर्थिक अनियमितताओं को लेकर अपनी जांच कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में भी इस केस की सुनवाई चल रही है, जहां राज्य सरकार से भूमि के मूल दस्तावेज की मांग की गई है।
डीजीपी अनुराग गुप्ता ने भी गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि यह घोटाला बड़े स्तर पर फैला हुआ है और आगे की जांच तेजी से जारी है।
अधिकारी भी शक के घेरे में, दस्तावेजों में गड़बड़ी उजागर
सीआईडी की टीम चास अंचलाधिकारी कार्यालय और बोकारो के डीएफओ रजनीश कुमार के साथ घंटों तक दस्तावेजों की जांच करती रही। इस दौरान 60 से 75 नंबर वॉल्यूम के पेज फाड़े हुए मिले, जिसमें करीब 400 एकड़ भूमि का रिकॉर्ड दर्ज था।
सूत्रों के अनुसार, यह घोटाला केवल भू-माफियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कुछ अंचल कर्मचारी और बोकारो स्टील प्लांट के अधिकारी भी संदिग्ध हैं।
क्या है पूरा मामला?
तेतुलिया मौजा की करीब 100 एकड़ वन भूमि को फर्जी दस्तावेजों के जरिए अवैध रूप से बेचा गया।
यह जमीन बोकारो स्टील प्लांट द्वारा वन विभाग को लौटाई गई थी।
प्रभारी वनपाल रुद्र प्रताप सिंह ने थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी।
मामला सेक्टर 12 थाना कांड संख्या 32/2024 के तहत दर्ज है।
सीआईडी ने इस केस को टेकओवर कर जांच शुरू कर दी है।
निष्कर्ष:
बोकारो के तेतुलिया में हुआ यह घोटाला केवल जमीन पर अवैध कब्जे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई उच्च पदस्थ अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। सीआईडी और ईडी की संयुक्त जांच से आने वाले दिनों में और भी कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।







