चौपारण में बेलपत्र तस्करी का खुलासा, बंगाल ले जा रही बस पकड़ी गई, वन विभाग की टीम पर हमला
हजारीबाग (1 अगस्त 2025): सावन महीने में बेलपत्र की बढ़ती मांग को देखते हुए हजारीबाग के गौतम बुद्ध वन्यप्राणी आश्रयणी क्षेत्र से बेलपत्र की अवैध तुड़ाई और तस्करी का सिलसिला लंबे समय से चल रहा था। इस पर पहली बार बड़ी कार्रवाई करते हुए वन विभाग की टीम ने चौपारण थाना क्षेत्र में एक बस से बड़ी मात्रा में बेलपत्र बरामद किया है।
गुप्त सूचना पर की गई कार्रवाई, बंगाल के लिए लदा था बेलपत्र
सूत्रों के अनुसार, वन विभाग को सूचना मिली थी कि एक निजी बस में बेलपत्र लादकर बंगाल के कोलकाता स्थित बाबूघाट फूल मंडी भेजा जा रहा है। इसपर गुरुवार देर रात थाना चौपारण के पास सघन चेकिंग अभियान चलाया गया।
सिमरन नामक बस (WB 57 E 4224) को रोककर तलाशी ली गई, जिसमें ताजे तोड़े गए बेलपत्र की बड़ी खेप बरामद की गई। बताया गया कि ये बेलपत्र बंगाल के मंदिरों और बाजारों में सावन के दौरान ऊंचे दामों पर बेचे जाते हैं।
टीम पर हमला और रिश्वत की पेशकश
जब वन विभाग की टीम ने बस को रोकने की कोशिश की, तो बस स्टाफ और कर्मियों ने विरोध किया, जिससे झड़प की स्थिति बन गई। इस दौरान वन विभाग के कुछ दैनिक कर्मचारी घायल हो गए।
इतना ही नहीं, तस्करी को नजरअंदाज करने के लिए ₹30,000 की रिश्वत देने की भी कोशिश की गई, जिसे टीम ने ठुकरा दिया। अंततः स्थिति को नियंत्रण में लेकर बस को जब्त कर लिया गया।
लंबे समय से चल रहा तस्करी का खेल
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पिछले 4–5 वर्षों से बेलपत्र की अवैध तुड़ाई और तस्करी हो रही थी, लेकिन यह पहली बार है जब विभाग ने इतनी बड़ी कार्रवाई की है। वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है और तस्करी से जुड़े नेटवर्क का भी पता लगाया जा रहा है।
बेलपत्र की मांग और बाजार
बंगाल, विशेषकर कोलकाता के बाबूघाट फूल-माला मंडी में सावन के दौरान बेलपत्र की भारी मांग होती है। इस कारण झारखंड के जंगलों से बेलपत्र की अवैध ढुलाई आम हो गई थी। यह मामला वन संपदा की तस्करी और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से गंभीर माना जा रहा है।
संभावित आगे की कार्रवाई
वन विभाग अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटा है, और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। इस कार्रवाई से अवैध तस्करी में लगे अन्य तस्करों में खलबली मच गई है।
यह खबर न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली है, बल्कि वन विभाग की तत्परता और निष्ठा का भी उदाहरण प्रस्तुत करती है।







