पब्लिक भी घोटालेबाजी में पीछे नहीं, गरीबों के हक पर डाका डाल रहे संपन्न लोग
आमतौर पर जनता नेताओं, अधिकारियों और सरकार पर घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोप लगाती है, लेकिन जब सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की बात आती है, तो खुद पब्लिक भी कम नहीं दिखती। सरकार गरीबों को सस्ती दर पर अनाज देने के लिए योजनाएं चलाती है, लेकिन इन्हीं योजनाओं का फायदा उठा रहे हैं वे लोग, जिनकी आर्थिक स्थिति मजबूत है।
हाल ही में जब आधार कार्ड से राशन कार्ड लिंकिंग की प्रक्रिया शुरू की गई और डाटा की जाँच हुई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिन लोगों की सालाना आय लाखों में है, जिनके पास चारपहिया वाहन हैं और जो किसी भी मानक से गरीब की श्रेणी में नहीं आते, वे भी बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) श्रेणी के लाल और पीला राशन कार्ड बनवाकर गरीबों के हिस्से का राशन ले रहे हैं।
जाँच में यह सामने आया है कि 25 लाख रुपये तक के टर्नओवर वाले घरों में भी बीपीएल कार्ड पाए गए हैं। ऐसे लोग वर्षों से सरकारी योजनाओं का गलत लाभ उठा रहे थे। आधार लिंकिंग के बाद अब सरकार ने इन अपात्र लाभार्थियों पर नकेल कसनी शुरू कर दी है।
राज्य भर में अपात्रों की हो रही पहचान
पूरे राज्य में इस तरह के मामलों की जांच की जा रही है और अपात्र लोगों की सूची तैयार की जा रही है। जिनका नाम इस सूची में आ रहा है, उनके राशन कार्ड रद्द करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इससे यह साफ हो गया है कि अब अपात्र लोग सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से नहीं उठा पाएंगे।
यह अभियान राज्य के हर जिले में चलाया जा रहा है और प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि गरीबों के हक पर डाका डालने वालों को बख्शा न जाए। यह कदम जहां एक ओर न्याय और पारदर्शिता की ओर बढ़ाया गया कदम है, वहीं इससे गरीबों को उनका वास्तविक अधिकार भी मिल पाएगा।







