शिविरों में उमड़ी जनता, योजनाओं का लाभ लेने को दिखा उत्साह
सोमवार को जिले के सभी प्रखंडों में आयोजित ‘आपकी योजना – आपकी सरकार – आपके द्वार’ सेवा अधिकार सप्ताह के शिविरों में भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही पंचायत परिसरों में आमजनों की लंबी कतारें दिखाई दीं।
ग्रामीणों ने सरकार द्वारा संचालित योजनाओं को एक ही मंच पर प्राप्त करने की सुविधा को बेहद सराहा।
अधिकारियों ने सुनीं समस्याएँ, कई मामलों का वहीं हुआ निष्पादन
जिला तथा प्रखंड स्तरीय अधिकारियों ने शिविरों में उपस्थित होकर—
आवेदन प्राप्त किए
समस्याएँ सुनीं
और कई मामलों का ऑन द स्पॉट निष्पादन किया
जहाँ त्वरित समाधान संभव नहीं था, वहाँ जल्द कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया। अधिकारियों ने कहा कि उद्देश्य शासन और जनता के बीच की दूरी को समाप्त करना और सेवाओं को सरल व पारदर्शी बनाना है।
वरीय नोडल पदाधिकारियों ने की पूरे दिन मॉनिटरिंग
प्रत्येक प्रखंड में नियुक्त वरीय नोडल पदाधिकारियों ने अलग-अलग शिविरों का निरीक्षण किया, विभागीय स्टॉलों की समीक्षा की और लाभुकों से सीधे संवाद किया।
प्रमुख वरीय नोडल पदाधिकारी थे—
शताब्दी मजूमदार — उप विकास आयुक्त (चास)
मेनका — निदेशक, डीपीएलआर (चंद्रपुरा)
प्रांजल ढांडा — एसडीओ चास (चंदनकियारी)
मो. मुमताज अंसारी — अपर समाहर्ता (जरीडीह)
मारुति मिंज — जिला परिवहन पदाधिकारी (पेटरवार)
मुकेश मछुआ — एसडीओ बेरमो (नावाडीह)
शालिनी खालको — जिला आपूर्ति पदाधिकारी (बेरमो)
द्वारिका बैठा — भू-अर्जन पदाधिकारी (कसमार)
मो. शफीक आलम — जिला पंचायती राज पदाधिकारी (गोमिया)
इन अधिकारियों ने शिविरों की व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और सेवा वितरण की गुणवत्ता का बारीकी से निरीक्षण किया।
लोगों में उत्साह—जाति, आवासीय, आय, राशन कार्ड सहित हजारों आवेदन प्राप्त
शिविरों में निम्न सेवाओं के लिए सबसे अधिक आवेदन प्राप्त हुए—
जाति प्रमाण पत्र
आवासीय प्रमाण पत्र
आय प्रमाण पत्र
जन्म/मृत्यु प्रमाण पत्र
नया व संशोधित राशन कार्ड
भूमि मापी एवं म्यूटेशन
भूमि धारण प्रमाण पत्र (LPC)
सामाजिक सुरक्षा पेंशन
कृषि एवं आवास से जुड़े आवेदन
लोगों ने बताया कि जहाँ पहले एक-एक सेवा के लिए कई चक्कर लगाने पड़ते थे, वहीं अब एक ही स्थान पर सभी सेवाएँ आसानी से मिल रही हैं।
बेहतर प्रबंधन—व्यवस्थित सेवाओं से ग्रामीणों को मिली राहत
शिविरों में लाभुकों की सुविधा के लिए प्रशासन ने—
हेल्प डेस्क
पेयजल
बैठने की समुचित व्यवस्था
पुलिस सहायता केंद्र
तकनीकी सहायता काउंटर
मीडिया प्रबंधन
जैसी व्यवस्थाएँ सुनिश्चित कीं, जिससे सेवा प्राप्ति की प्रक्रिया सुचारू और सरल रही।







