सफलता की कहानी: बोकारो के किसान बासुदेव महतो बने सब्ज़ी उत्पादन में प्रेरणास्रोत
एक साधारण किसान से प्रेरणादायक कृषि उद्यमी तक का सफर
जन कल्याणकारी सरकार का उद्देश्य समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास की किरण पहुंचाना होता है। इसी सोच को साकार करते हुए झारखंड सरकार की कृषि योजनाएं किसानों को आत्मनिर्भर बना रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है बासुदेव महतो की, जो बोकारो जिले के पेटरवार प्रखंड के पिछड़ी पंचायत के धधकीडीह गांव के निवासी हैं।
बचपन से संघर्ष, फिर खेती से नया जीवन
बचपन से आर्थिक संघर्ष झेलने वाले बासुदेव महतो ने कभी बाहर नौकरी की, परन्तु आय संतोषजनक न होने के कारण वे पुनः गांव लौटे। वर्ष 2020 से उन्होंने सब्जियों की खरीद-बिक्री शुरू की। फिर दो एकड़ जमीन लीज पर लेकर खेती शुरू की, और अपने कठिन परिश्रम से धीरे-धीरे सफलता की ओर बढ़े।
कृषि योजनाओं से मिली नई दिशा
वर्ष 2024 में वे जिला कृषि कार्यालय और आत्मा योजना के संपर्क में आए। उन्हें किसान समृद्धि योजना के अंतर्गत सोलर पंप आधारित सिंचाई इकाई मिली, जिससे उनकी खेती वर्षभर सुचारू रूप से चलने लगी। उन्हें वैज्ञानिक तरीके से फसल उत्पादन का प्रशिक्षण भी मिला।
अब वे टमाटर, भिंडी, फूल गोभी, बैगन, आलू, मिर्च, प्याज जैसी सब्ज़ियों के साथ धान और गेहूं की भी सफल खेती कर रहे हैं।
आज की स्थिति: सालाना लाखों की आमदनी
बासुदेव महतो आज लगभग 5 से 7 लाख रुपये प्रतिवर्ष की आमदनी कर रहे हैं। उनका जीवन स्तर सुधर चुका है और वे झारखंड के सफल सब्ज़ी उत्पादकों में एक प्रेरणा बन चुके हैं। उन्होंने नवीन तकनीकों को अपनाकर खेती को एक लाभदायक व्यवसाय में बदला है।
संघर्ष, समर्पण और सरकारी योजनाओं से बदली तक़दीर
बासुदेव महतो की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सीमित संसाधन और कठिन परिस्थितियां भी सफलता में बाधा नहीं बन सकतीं, यदि इच्छाशक्ति, मेहनत और सही मार्गदर्शन हो।







