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झारखंड शराब घोटाला: वरिष्ठ IAS अधिकारी विनय चौबे और गजेंद्र सिंह गिरफ्तार, ACB ने की कार्रवाई

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IAS अधिकारी विनय चौबे और गजेंद्र सिंह झारखंड शराब घोटाले में गिरफ्तार, ACB की बड़ी कार्रवाई

आबकारी विभाग की नीति में अनियमितताओं की जांच के बाद हुई गिरफ्तारी, 3 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजे गए

रांची, 21 मई 2025 — झारखंड में शराब घोटाले (Jharkhand Liquor Scam) के मामले में वरिष्ठ IAS अधिकारी विनय चौबे और आबकारी विभाग के संयुक्त आयुक्त गजेंद्र सिंह को मंगलवार को ACB ने गिरफ्तार कर लिया। दोनों अधिकारियों से ATS मुख्यालय में घंटों पूछताछ के बाद यह कार्रवाई की गई।

📌 सुबह से शुरू हुई पूछताछ, शाम को हुई गिरफ्तारी:

सुबह लगभग 11 बजे ACB की टीम विनय चौबे के आवास पहुंची और उन्हें हिरासत में लेकर ATS मुख्यालय ले गई। पूछताछ के बाद शाम में गिरफ्तारी कर स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 3 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बाद में उन्हें होटवार स्थित बिरसा मुंडा जेल ले जाया गया।


🕵️‍♂️ क्या है मामला?

ACB ने IAS विनय चौबे के आबकारी सचिव कार्यकाल के दौरान शराब नीति में हुई अनियमितताओं की जांच शुरू की थी। आरोप है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ के अधिकारियों के साथ मिलकर झारखंड उत्पाद नीति को बदलने की योजना बनाई थी, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ।


🔍 ईडी की जांच और छापेमारी:

  • अक्टूबर 2024 में ED ने विनय चौबे और गजेंद्र सिंह के ठिकानों पर छापे मारे थे।

  • 31 मार्च 2022 से लागू नई शराब नीति में कई खामियां पाई गईं।

  • छत्तीसगढ़ की एजेंसियों को दो वर्षों तक झारखंड में कार्यरत रहने दिया गया।


⚖️ छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से भी कनेक्शन:

इस मामले में छत्तीसगढ़ के अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर और अरुणपति त्रिपाठी जैसे अफसरों की सिंडिकेट से भी इनके संबंध बताए गए हैं।
रायपुर EOW द्वारा दर्ज शराब घोटाले में भी विनय चौबे आरोपी हैं। वे अप्रैल 2023 में रायपुर जाकर अपना बयान दर्ज करा चुके हैं।


📂 सरकार ने दी थी एफआईआर की अनुमति:

झारखंड सरकार ने पहले ही विनय चौबे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी थी। ACB ने इसी अनुमति के तहत PE दर्ज कर जांच शुरू की थी, जिसका परिणाम अब सामने आया है।


🧾 नकली होलोग्राम और अवैध शराब सप्लाई से हुआ करोड़ों का नुकसान:

नई नीति लागू होने के बाद नकली होलोग्राम और अवैध शराब की आपूर्ति के चलते झारखंड सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।


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