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भारतीय नौसेना को मिली नई मजबूती, SAIL ने INS दूनागिरी, अग्रय और संशोधक के लिए दी 5700 टन रक्षा-ग्रेड स्टील

‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ को मिला बल, SAIL की विशेष DMR 249A स्टील से तैयार हुए नौसेना के अत्याधुनिक युद्धपोत

नई दिल्ली | 24 जून 2026

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने भारतीय नौसेना की सामरिक शक्ति को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कंपनी ने हाल ही में नौसेना में शामिल किए गए तीन अत्याधुनिक युद्धपोतों—INS दूनागिरी, INS अग्रय और INS संशोधक—के निर्माण के लिए 5,700 टन विशेष रक्षा-ग्रेड स्टील की आपूर्ति की है। यह उपलब्धि भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई मजबूती प्रदान करती है।

भारतीय नौसेना के लिए SAIL की बड़ी उपलब्धि

इस्पात मंत्रालय के अधीन महारत्न कंपनी SAIL ने भारतीय नौसेना के तीन अत्याधुनिक जहाजों—उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट INS दूनागिरी, एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट INS अग्रय और सर्वेक्षण पोत INS संशोधक—के निर्माण के लिए संपूर्ण 5,700 टन विशेष गुणवत्ता वाले रक्षा-ग्रेड स्टील की आपूर्ति की।

इन तीनों जहाजों को 21 जून 2026 को कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट में आयोजित ऐतिहासिक समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारतीय नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया।

बोकारो, भिलाई और राउरकेला प्लांट ने निभाई अहम भूमिका

SAIL ने इन युद्धपोतों के लिए विशेष गुणवत्ता वाली DMR 249A ग्रेड हॉट-रोल्ड शीट और प्लेट का उत्पादन किया। यह स्टील बोकारो, भिलाई और राउरकेला इस्पात संयंत्रों में तैयार की गई।

यह उपलब्धि दर्शाती है कि SAIL देश की समुद्री सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकी क्षमता और उत्पादन दक्षता रखता है।

आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिल रही मजबूती

SAIL लगातार ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को आगे बढ़ा रहा है। कंपनी भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए विशेष स्टील का उत्पादन कर रक्षा स्वदेशीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

रक्षा क्षेत्र की बढ़ती मांग को देखते हुए SAIL ने विशेष रूप से राउरकेला स्टील प्लांट के स्पेशल प्लेट प्लांट में DMR ग्रेड प्लेटों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त पहल भी शुरू की है।

INS विक्रांत सहित कई प्रमुख युद्धपोतों को दे चुका है स्टील

SAIL का रक्षा क्षेत्र में योगदान पहले भी उल्लेखनीय रहा है। कंपनी ने भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत के साथ-साथ प्रोजेक्ट 17A के स्टील्थ फ्रिगेट्स INS नीलगिरि, INS हिमगिरि और INS उदयगिरि के निर्माण के लिए भी विशेष स्टील उपलब्ध कराई थी।

इसके अलावा INS अजय, INS निस्तार और INS अंजदीप जैसे महत्वपूर्ण नौसैनिक प्लेटफार्मों में भी SAIL की स्टील का उपयोग किया गया है।

SAIL चेयरमैन ने जताया गर्व

SAIL के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. अशोक कुमार पंडा ने कहा कि कंपनी भारत की आत्मनिर्भरता और रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि DMR 249A जैसी उच्च क्षमता वाली स्टील प्लेटों की आपूर्ति न केवल भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता को मजबूत करती है, बल्कि SAIL की उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता और गुणवत्ता मानकों को भी प्रमाणित करती है।

देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में SAIL की यह भूमिका भारतीय इस्पात उद्योग और रक्षा स्वदेशीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

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