बोकारो इस्पात संयंत्र ने अपशिष्ट पुनर्चक्रण और संसाधन संरक्षण के क्षेत्र में हासिल की महत्वपूर्ण उपलब्धियां, सतत विकास को मिला नया आयाम
बोकारो | 23 जून 2026
बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में सर्कुलर इकोनॉमी और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल को बढ़ावा देने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। अपशिष्ट पदार्थों के पुनर्चक्रण, संसाधनों के बेहतर उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए नवाचारों ने न केवल उत्पादन लागत घटाई है, बल्कि राजस्व सृजन और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल से संसाधनों का बेहतर उपयोग
भारत सरकार की सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा को साकार करने की दिशा में बीएसएल ने कई अभिनव पहलें की हैं। संयंत्र ने पहली बार बेसिक ऑक्सीजन फर्नेस (BOF) स्लज का सफलतापूर्वक सिंटर प्लांट में उपयोग किया, जिससे लौह अयस्क फाइन्स की खपत कम हुई। वहीं डीकैंटर टार स्लज को मिश्रित कोयले में पुनर्चक्रित कर उत्पादन लागत और कार्बन उत्सर्जन दोनों में कमी लाई गई।
इसके अलावा अपशिष्ट लाइमस्टोन फाइन्स के उपयोग से सिंटर उत्पादन की दक्षता बढ़ी और फ्लक्स की खरीद पर होने वाले खर्च में भी कमी आई।
स्लैग और उपोत्पादों के पुनर्चक्रण से मिला बड़ा लाभ
बीएसएल ने ब्लास्ट फर्नेस स्लैग का ग्रेनुलेशन कर सीमेंट उद्योग को बड़े पैमाने पर इसकी आपूर्ति की। इससे सीमेंट निर्माण में क्लिंकर की आवश्यकता कम हुई और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।
संयंत्र ने प्रोसेस्ड एलडी स्लैग का लगभग शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित किया। इसका इस्तेमाल सिंटर निर्माण, इस्पात उत्पादन, रेलवे बैलास्ट तथा सड़क निर्माण परियोजनाओं में किया गया।
अपशिष्ट सामग्री बनी मूल्यवान कच्चा माल
बीएसएल ने मिल स्केल, ब्लास्ट फर्नेस फ्ल्यू डस्ट, ईएसपी डस्ट, कोक ब्रीज और फेरस स्लैग जैसी सामग्रियों का पुनर्चक्रण कर उन्हें सेकेंडरी रॉ मैटेरियल के रूप में उपयोग में लाया। इससे प्राथमिक कच्चे माल पर निर्भरता कम हुई और संसाधनों की पुनर्प्राप्ति को बढ़ावा मिला।
बाइ-प्रोडक्ट्स की बिक्री से बढ़ा राजस्व
संयंत्र ने ब्लास्ट फर्नेस ग्रेनुलेटेड स्लैग, कास्ट हाउस ग्रेनुलेटेड स्लैग, कोल टार, अमोनियम सल्फेट, पिच, नैफ्थलीन उत्पाद, प्रोसेस्ड स्लैग और पिग आयरन जैसे बाइ-प्रोडक्ट्स की बिक्री के माध्यम से उल्लेखनीय आर्थिक मूल्य सृजित किया है।
जो सामग्री कभी अपशिष्ट मानी जाती थी, वही आज विभिन्न उद्योगों के लिए किफायती और उपयोगी कच्चे माल के रूप में उपलब्ध कराई जा रही है।
सतत इस्पात निर्माण की दिशा में नया मानक
बीएसएल की इन पहलों से अपशिष्ट उत्पादन और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आई है। साथ ही डाउनस्ट्रीम उद्योगों को गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती सेकेंडरी कच्चा माल उपलब्ध कराने में भी मदद मिली है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि बोकारो इस्पात संयंत्र नवाचार, संसाधन दक्षता और पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से भारत को लो-कार्बन एवं संसाधन-कुशल अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।




