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STET परीक्षा TRE 4.0 से पहले कराना हो अनिवार्य – सांसद सुधाकर सिंह की मांग

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बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने BPSC TRE 4.0 से पहले STET परीक्षा आयोजित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि देरी से लाखों शिक्षाकांक्षी युवाओं के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है।

सांसद सुधाकर सिंह ने दी चेतावनी – TRE 4.0 से पहले हो STET परीक्षा, वरना होगा आंदोलन

कैमूर: बक्सर लोकसभा सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार सरकार और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) पर बड़ा हमला बोलते हुए STET परीक्षा को TRE 4.0 से पहले आयोजित करने की अनिवार्यता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि यह मामला लाखों शिक्षाकांक्षी युवाओं के भविष्य और शिक्षा प्रणाली की साख से जुड़ा है।

सांसद ने BSEB अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 के परीक्षा कैलेंडर में STET परीक्षा साल में दो बार कराए जाने का वादा था, लेकिन अब तक सिर्फ एक बार परीक्षा कराई गई है, जिससे B.Ed और D.El.Ed के नए पासआउट अभ्यर्थी TRE 4.0 में भाग नहीं ले पाएंगे।

भविष्य से हो रहा खिलवाड़: सुधाकर सिंह

सुधाकर सिंह ने कहा,

“अगर TRE 4.0, STET परीक्षा के बिना कराई जाती है, तो यह लाखों योग्य युवाओं के भविष्य से धोखा और उनकी मेहनत व प्रतिभा का अपमान होगा। सरकार की देरी युवाओं के लिए अन्यायपूर्ण है।”

उन्होंने बताया कि BSEB को छात्रों द्वारा हजारों ज्ञापन, आवेदन और ईमेल भेजे जा चुके हैं, लेकिन कोई गंभीर पहल नहीं हुई। जबकि खुद विभाग की ओर से 25 अप्रैल 2025 को परीक्षा आयोजन को लेकर पत्र जारी किया गया था (पत्रांक – 234), लेकिन अब तक आधिकारिक तिथि की घोषणा नहीं हुई।

जनांदोलन की चेतावनी

सांसद ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द STET की तिथि घोषित नहीं की और TRE 4.0 के पहले परीक्षा नहीं कराई गई, तो यह एक संगठित साजिश मानी जाएगी।
उन्होंने कहा कि

“यह सिर्फ परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका और उम्मीद का सवाल है। अगर निर्णय नहीं लिया गया तो हमें आंदोलन की राह पकड़नी पड़ेगी।”

STET को हर साल दो बार आयोजित करने की मांग

सुधाकर सिंह ने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि STET परीक्षा को नियमित रूप से साल में दो बार आयोजित किया जाए, ताकि भविष्य में युवाओं को इस तरह की अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

युवाओं से एकजुट संघर्ष की अपील

अंत में, राजद सांसद ने बिहार के शिक्षाकांक्षी युवाओं से अपील की कि वे शांति बनाए रखें लेकिन अपने हक के लिए संगठित और दृढ़ संघर्ष करें।

“हमारे हक की लड़ाई सच्चाई और न्याय की है। मिलकर आवाज़ उठाएं ताकि सत्ता को झुकना पड़े।”

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