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रेल कर्मचारियों का नैतिक समर्थन, 9 जुलाई को देशव्यापी हड़ताल में शामिल नहीं होंगे, पर विरोध करेंगे

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ईस्ट सेंट्रल रेलवे यूनियन ने दिया 9 जुलाई की हड़ताल को नैतिक समर्थन

धनबाद: केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के विरोध में 9 जुलाई 2025 को प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को लेकर रेलवे यूनियनों में हलचल तेज हो गई है। ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन (ECRKU) ने दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत इस हड़ताल को नैतिक समर्थन देने का फैसला किया है। हालांकि रेलवे कर्मचारी सीधे हड़ताल में भाग नहीं लेंगे, लेकिन विरोध स्वरूप काला बैज लगाकर कार्यस्थल पर ड्यूटी करेंगे और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगे।

यह जानकारी यूनियन के अपर महामंत्री और ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन (AIRF) के वर्किंग कमिटी सदस्य मोहम्मद ज़्याऊद्दीन ने दी। उन्होंने धनबाद मंडल की सभी शाखाओं को गेट मीटिंग, पोस्टर-बैनर और जागरूकता अभियानों के आयोजन का निर्देश दिया है।

हड़ताल के मुख्य कारण:

AIRF जोनल सेक्रेटरी ओ.पी. शर्मा ने बताया कि यह देशव्यापी हड़ताल चार नए लेबर कोड को रद्द करने की मांग को लेकर बुलाई गई है। यूनियन नेताओं का कहना है कि ये श्रम संहिताएं मजदूरों के मौलिक अधिकारों को कुचलने वाली हैं।

अन्य प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • पुरानी पेंशन योजना की बहाली

  • न्यूनतम वेतन ₹26,000 प्रतिमाह

  • ठेका प्रथा का अंत

  • सरकारी विभागों के निजीकरण पर रोक

  • बेरोजगारों को भत्ता देने की योजना

विभिन्न क्षेत्रों में दिखेगा हड़ताल का असर

इस हड़ताल में डाक विभाग, बैंकिंग, बीमा, स्टील, कोयला, खनिज, पेट्रोलियम, रक्षा उत्पादन जैसे प्रमुख सेक्टरों के लगभग 25 करोड़ कर्मचारी भाग लेंगे।

यूनियनों का आरोप है कि सरकार ने पूंजीपतियों को ₹17 लाख करोड़ की राहत दी, जबकि मजदूरों और किसानों की समस्याओं की अनदेखी की गई है।

नैतिक समर्थन में शामिल नेता और संगठन

ईसीआरकेयू के केंद्रीय संगठन मंत्री नेताजी सुभाष, सोमेन दत्ता, एन.के. खवास, जितेंद्र कुमार साव, बसंत दूबे, आर.के. सिंह, बी.के. साव, आई.एम. सिंह, चंदन शुक्ला सहित दर्जनों नेताओं ने इस विरोध को संविधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार बताया और इसका नैतिक समर्थन जताया।


निष्कर्ष:
हालांकि ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन सीधे हड़ताल में शामिल नहीं होगी, लेकिन सरकार की नीतियों के विरोध में अपनी आवाज़ उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह विरोध श्रमिकों के भविष्य और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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