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बंजर ज़मीन पर उगाई समृद्धि की फसल, महिला समूह ने गांव की तस्वीर बदली

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बंजर ज़मीन पर उगाई समृद्धि की फसल, महिला समूह ने गांव की तस्वीर बदली

बंजर ज़मीन पर उगाई समृद्धि की फसल, महिला समूह ने गांव की तस्वीर बदली

📍कसमार, बोकारो:
झारखंड के बोकारो ज़िले के कसमार प्रखंड अंतर्गत हीसिम गांव के कटहल टोला की महिलाओं ने वो कर दिखाया है, जो कभी असंभव माना जाता था। मनरेगा के तहत बिरसा हरित ग्राम योजना और महिला स्वयं सहायता समूह की मेहनत से आज बंजर ज़मीन पर हरियाली लहलहा रही है।

यह बदलाव संतोषी महिला मंडल (SHG) की 15 महिलाओं के सामूहिक प्रयासों और विभिन्न सरकारी योजनाओं व संस्थाओं के सहयोग से संभव हुआ है। कभी फसल के नाम पर खाली रहने वाली ज़मीन अब आम बागवानी, शकरकंद, कुरथी और सब्जियों से लहलहा रही है।


🌱 बंजर ज़मीन से शुरू हुआ हरियाली का सफर

हीसिम गांव का कटहल टोला पहाड़ी और टांड क्षेत्र में आता है, जहां जल-सिंचाई की सुविधाओं का अभाव है। यहां खेती-किसानी की संभावनाएं बेहद सीमित थीं। लेकिन मनरेगा योजना के तहत महिलाओं को जब बिरसा हरित ग्राम योजना की जानकारी मिली, तब उन्होंने बागवानी और मिश्रित फसल के जरिये आत्मनिर्भर बनने की ठानी।


🤝 सरकारी और संस्थागत समर्थन बना संबल

JSPL, NABARD, PRADAN संस्था और अन्य भागीदारों ने महिलाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बाजार से जोड़ने की व्यवस्था दी। इसके साथ ही महिलाओं की बनाई गई “ग्रामीण हरित क्रांति महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड” (FPC) ने उन्हें सीधे बाजार से जोड़ा।

वर्ष 2025 में पहली बार इन महिलाओं ने 15 क्विंटल से अधिक आम की बिक्री की और उचित मूल्य पाया। इससे उन्हें न सिर्फ आर्थिक लाभ हुआ, बल्कि समाज में पहचान भी मिली।


🍠 मिश्रित खेती से आय में वृद्धि

महिलाओं ने आम बागवानी के साथ शकरकंद, कुरथी और मौसमी सब्जियां भी उगानी शुरू कीं। अब ये महिलाएं हर वर्ष ₹45,000 से ₹55,000 तक की आय अर्जित कर रही हैं। परिवार के आर्थिक निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ी है और वे पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं।


💬 “हमारा आम अब आम नहीं, खास बन गया है”

समिति की सदस्य श्रावणी देवी, सुनिया देवी, फूलमणि देवी और अन्य महिलाओं ने गर्व से कहा –

“पहले हमारे आमों को कोई नहीं पूछता था। अब हमारे आमों को बाजार में उचित कीमत मिल रही है। यह हमारे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।”


📢 प्रशासन ने सराहा

अजय नाथ झा, उपायुक्त, बोकारो

“यह बदलाव महिला सशक्तिकरण और सरकारी योजनाओं की सफलता का प्रतीक है। अन्य महिला समूहों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।”
– अजय नाथ झा, उपायुक्त, बोकारो

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