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जनवादी लेखक संघ, झारखंड का दो दिवसीय सम्मेलन बोकारो में प्रारंभ, लोकतंत्र व साहित्य पर केंद्रित विचार

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विश्व शांति और समाजवाद के शहीदों को श्रद्धांजलि के साथ सम्मेलन का शुभारंभ

बोकारो: पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, जनवादी लेखक संघ, झारखंड का दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन आज डॉ. नर नारायण तिवारी नगर स्थित अल हबीब ऑडिटोरियम में प्रारंभ हुआ। उद्घाटन के पहले सत्र की शुरुआत विश्व-शांति और समाजवाद के संघर्ष में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई।


वर्तमान लोकतांत्रिक संकट पर डॉ. बजरंग बिहारी तिवारी की टिप्पणी

सम्मेलन का उद्घाटन प्रख्यात आलोचक डॉ. बजरंग बिहारी तिवारी ने किया। उन्होंने कहा कि “देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर आज फासीवादी ताकतें सुनियोजित हमले कर रही हैं। ऐसे दौर में लेखकों की भूमिका और जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।” उन्होंने सरकार की मनुवादी सोच और धार्मिक कट्टरता के खतरनाक प्रभावों पर भी प्रकाश डाला।


साहित्यकारों को एकजुट होने की आवश्यकता: डॉ. कर्मानंद आर्य

मुख्य अतिथि, गया केंद्रीय विश्वविद्यालय के व्याख्याता डॉ. कर्मानंद आर्य ने कहा कि “अम्बेडकरवादी और जनवादी दोनों धारा के लेखकों को मौजूदा समय में पूंजीवाद और सांप्रदायिकता के विरुद्ध एकजुट संघर्ष करना होगा।”


छः पुस्तकों का लोकार्पण, साहित्यकारों का सम्मान

इस अवसर पर कुल छह पुस्तकों का विमोचन किया गया, जिनमें शामिल हैं:

  1. जलेस, झारखंड की स्मारिका

  2. रेखांकन पत्रिका

  3. प्रेमचंद हमारे हमसफ़र – डॉ. मृणाल

  4. तड़प एक लड़की की – शिव कुमार पंडित

  5. खामोशी की आवाज (संपादक: प्राणेश कुमार)

  6. पीर और गहरी हो गई (गीत-ग़ज़ल संग्रह) – प्राणेश कुमार

इसके साथ ही प्रख्यात साहित्यकार डॉ. मृणाल को ‘रमणिका गुप्ता साहित्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया।


साहित्य का सामाजिक सरोकार विषय पर हुआ वैचारिक सत्र

द्वितीय सत्र में “साहित्य का सामाजिक सरोकार” विषय पर विचार-विमर्श हुआ। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. अली इमाम खान, प्रहलाद चन्द्र दास और डॉ. मृणाल ने की।
कथाकार अशोक कुमार द्वारा प्रस्तुत आलेख पर हुई चर्चा में गोपाल प्रसाद, ओमराज, डॉ. किरण, शैलेन्द्र अस्थाना, डॉ. सुजाता कुमारी, डॉ. जमशेद कमर, परवेज शीतल सहित अन्य विद्वानों ने भाग लिया।

सभी ने एक स्वर में कहा कि दलित, आदिवासी, मजदूर, किसान और महिला आंदोलनों के साथ साहित्यकारों को जनवादी चेतना के साथ खड़ा होना चाहिए।


सम्मेलन में झारखंड के सभी जिलों के साहित्यकारों की सहभागिता

कार्यक्रम का संचालन अशोक कुमार और कुमार सत्येन्द्र ने किया। झारखंड के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों साहित्यकारों की उपस्थिति इस सम्मेलन की सफलता का प्रमाण बनी।

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