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नाला प्रखंड के देवजोड़ गांव में 171 वर्षों से हो रही दुर्गापूजा, उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

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नाला प्रखंड के देवजोड़ गांव में 171 वर्षों से हो रही दुर्गापूजा, उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

देवजोड़: नाला प्रखंड के देवजोड़ गांव का दुर्गोत्सव इस वर्ष भी पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार वर्ष 1864 से शुरू हुई यह पूजा आज 171 वर्ष पूरे कर चुकी है। गांव के भट्टाचार्य परिवार के सौजन्य से आरंभ हुई इस परंपरा में पूरे गांव के रैयत मिलकर भागीदारी निभाते हैं।

महाषष्ठी से ही देवी पूजा का आगाज हो जाता है। महासप्तमी के दिन कदमा तालाब से गाजे-बाजे और माता रानी के जयकारे के साथ कलशयात्रा निकलती है और मूर्ति स्थापना के साथ ही विधिवत पूजा का शुभारंभ होता है। महाअष्टमी पर देवी की प्रतिमा कृष्टिगोचर होती है, जिसके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

देवजोड़ का यह दुर्गोत्सव आसपास के गांवों ही नहीं बल्कि झारखंड, बंगाल, बिहार सहित अन्य राज्यों में बसे प्रवासियों को भी अपने गांव खींच लाता है। दशहरा यहां एक सामाजिक मिलन समारोह का रूप ले लेता है।

इस मंदिर में वैष्णवी पूजा पद्धति से दुर्गोत्सव आयोजित किया जाता है। विशेषता यह है कि यहां बलि के रूप में पशु नहीं, बल्कि बड़े आकार के लड्डू (रचना) की बलि दी जाती है। पुरोहित दीपक भट्टाचार्य वैदिक कर्मकांडों के साथ पूजा संपन्न कराते हैं।

विजयादशमी पर खिचड़ी भोग और मूर्ति विसर्जन


विजयादशमी के दिन खिचड़ी भोग का आयोजन किया जाता है। आसपास के मालडीहा, केवलजोड़िया, कुरलजोड़िया, मागुरा, भूली, रघुनाथचक, केंदुआ, आसनजोड़ी आदि गांवों से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। विजयादशमी को कलश विसर्जन तथा एकादशी को मूर्ति विसर्जन के साथ दुर्गोत्सव का समापन होता है।

इस वर्ष मूर्ति निर्माण का कार्य पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के पांचरा गांव के मूर्तिकार कन्हाई सूत्रधार द्वारा किया गया है।

पूजा समिति के अध्यक्ष सेवक भट्टाचार्य और सचिव हेमंत गोराई के नेतृत्व में स्वपन भट्टाचार्य, विपुल भट्टाचार्य, मोहन भट्टाचार्य, सौगात भट्टाचार्य, बलराम भट्टाचार्य, कृपासिंधु भट्टाचार्य, विकास दास, सोमनाथ चक्रवर्ती, पप्पू मुखर्जी, मृण्मय माजी, गौर भट्टाचार्य, सौरव माजी, कैलाश दास और यदु भट्टाचार्य सहित कई लोग आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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