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लुगुबुरु की वादियों में भरोसे का संवाद: डीसी ने पेड़ की छांव तले सुनी ग्रामीणों की पीड़ा

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लुगुबुरु की वादियों में भरोसे का संवाद: डीसी ने पेड़ की छांव तले सुनी ग्रामीणों की पीड़ा

गोसे गांव में डीसी-एसपी-डीडीसी ने किया लोक संवाद, हर समस्या के समाधान की तय होगी टाइमलाइन

बोकारो: लुगुबुरु पहाड़ की तलहटी में बसे गोसे गांव में बुधवार को प्रशासन और ग्रामीणों के बीच भरोसे का अनोखा संवाद देखने को मिला।

प्रकृति की गोद में, पेड़ की छांव तले उपायुक्त अजय नाथ झा, पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीना और उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार सहित जिला स्तरीय अधिकारियों ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान का भरोसा दिया।


🌿 “आया राम-गया राम नहीं होगा” – डीसी

ग्रामीणों से संवाद करते हुए उपायुक्त ने स्पष्ट कहा कि यह दौरा औपचारिक नहीं है, बल्कि विश्वास को मजबूत करने की पहल है।

उन्होंने कहा कि सभी समस्याओं को सूचीबद्ध किया गया है और 2-3 दिनों के भीतर संबंधित विभागों के साथ बैठक कर समाधान की समयसीमा तय की जाएगी।


🏡 मूलभूत सुविधाओं पर जोर

ग्रामीणों ने सड़क, पुल, सिंचाई, जल संरक्षण, स्कूल और आंगनबाड़ी से जुड़ी समस्याएं रखीं।

डीसी ने इन सभी मुद्दों पर ठोस कार्रवाई का भरोसा देते हुए कहा कि विकास योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।


🌱 आजीविका के नए अवसर

उपायुक्त ने स्वयं सहायता समूहों (SHG) को सक्रिय करते हुए

  • फलदार पौधारोपण
  • मधुमक्खी पालन

जैसे कार्यों से ग्रामीणों को जोड़ने की बात कही, ताकि आय के नए स्रोत विकसित हो सकें।


⚖️ मुआवजा मामलों पर भी पहल

टीवीएनएल से जुड़े लंबित मुआवजा मामलों पर भी उपायुक्त ने भू-अर्जन विभाग के साथ बैठक कर जल्द समाधान का भरोसा दिया।


👮 एसपी का संदेश: पुलिस हर समय साथ

एसपी नाथू सिंह मीना ने कहा कि क्षेत्र में अब स्थिति नियंत्रण में है और विकास कार्यों में तेजी लाई जाएगी।

उन्होंने बताया कि हर गुरुवार को थाना दिवस आयोजित होगा, जहां भूमि विवाद जैसे मामलों का समाधान किया जाएगा।


🏥 डीडीसी का आश्वासन

डीडीसी शताब्दी मजूमदार ने कहा कि दूरस्थ गांवों तक प्रशासन की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ही यह पहल की गई है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी शिकायतों पर कार्रवाई की जाएगी।


🎒 बच्चों के बीच स्नेह

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बच्चों को कॉपी-कलम, बैट-बॉल, चॉकलेट और बिस्कुट वितरित कर स्नेह जताया।


🌟 निष्कर्ष:

लुगुबुरु की वादियों में पेड़ की छांव तले हुआ यह संवाद सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच भरोसे, सहभागिता और संवेदनशीलता की मजबूत मिसाल बनकर उभरा।

इस पहल ने यह साबित कर दिया कि अब शासन गांव की चौपाल तक पहुंच चुका है।

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