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बोकारो में नदी और जंगल संरक्षण पर जोर, जिला गंगा समिति की बैठक में उपायुक्त ने दिए अहम निर्देश

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नमामि गंगे योजना के तहत नदियों का विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करने, जैव विविधता मानचित्रण और वनाग्नि रोकथाम पर बनी रणनीति

बोकारो | 23 जून 2026

बोकारो में नमामि गंगे योजना के तहत आयोजित जिला गंगा समिति की बैठक में नदी संरक्षण, जैव विविधता, पर्यावरणीय संतुलन और वनाग्नि रोकथाम को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि नदी और जंगल एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके संरक्षण के बिना पर्यावरण संतुलन संभव नहीं है। उन्होंने जिले की सभी नदियों का विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करने तथा वनाग्नि की संभावित घटनाओं को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।

जिला गंगा समिति की बैठक में पर्यावरण संरक्षण पर विस्तृत चर्चा

नमामि गंगे योजना के अंतर्गत जिला गंगा समिति, बोकारो की बैठक उपायुक्त-सह-अध्यक्ष अजय नाथ झा की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने नदी संरक्षण, पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन और पर्यावरणीय चुनौतियों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।

उपायुक्त ने चास नगर निगम द्वारा निर्मित डी-सिल्टिंग चैम्बर के शीघ्र उद्घाटन और उसके प्रभावी उपयोग के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि यह संरचना जल संरक्षण और जल निकायों में गाद जमाव की समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

नदी और जंगल का अस्तित्व एक-दूसरे से जुड़ा

बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि नदी और जंगल का अस्तित्व एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। यदि जंगलों को बचाना है तो नदियों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।

उन्होंने वन विभाग को जिले की नदियों और उनके आसपास के क्षेत्रों की जैव विविधता का वैज्ञानिक मानचित्रण (Biodiversity Mapping) कराने का निर्देश दिया, ताकि स्थानीय वनस्पतियों, जीव-जंतुओं और पारिस्थितिकीय संसाधनों का सटीक आकलन किया जा सके।

सभी नदियों का तैयार होगा विस्तृत प्रतिवेदन

उपायुक्त ने नमामि गंगे योजना के अंतर्गत जिले की सभी नदियों एवं उनके आसपास के क्षेत्रों की पहचान और सूचीकरण कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण, पुनर्जीवन और जल प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों के समन्वय से दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके लिए प्रत्येक नदी का विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करना आवश्यक होगा।

एल-नीनो के प्रभाव से वनाग्नि की आशंका

बैठक में एल-नीनो के प्रभाव के कारण जंगलों में आग लगने की संभावित घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त की गई। उपायुक्त ने वन विभाग को वनाग्नि से संबंधित विस्तृत अध्ययन, रोकथाम और शमन उपायों की कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि सीसीएल, ओएनजीसी और बीएसएल के सहयोग से वनाग्नि प्रबंधन एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में समन्वित प्रयास किए जाएंगे, ताकि किसी भी संभावित संकट का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

पर्यावरण संरक्षण के लिए समेकित दृष्टिकोण जरूरी

उपायुक्त ने कहा कि नदियों के जल प्रवाह और पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन के लिए समेकित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में सभी विभागों को मिलकर कार्य करना होगा, तभी स्थायी और प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकेंगे।

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