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मां दुर्गा के आशीर्वाद से मिलती है शक्ति तीन वर्षों से किडनी रोग से ग्रसित होने के बाद भी दुर्गा पूजा में पूजा करने पहुंच जाते हैं राजेश्वर सिंह लोग भी करते हैं इनके जज्बे को सलाम।

बोकारो : मां दुर्गा के आशीर्वाद से मिलती है शक्ति, पिछले तीन वर्षों से किडनी रोग से ग्रसित होने के बाद भी दुर्गा पूजा में पूजा करने पहुंच जाते हैं राजेश्वर सिंह |

एक दिन छोड़ छोड़ के होता है उनका डायलिसिस। लोग भी करते हैं इनके जज्बे को सलाम। उनसे जब इस मुद्दे पर की गई बात तो आंखों में भर गए आंसू।

               
चारों तरफ दुर्गा पूजा की धूम है, बोकारो के विभिन्न सेक्टरों में दुर्गा पूजा पंडाल का निर्माण चल रहा है। लेकिन सेक्टर 2c दुर्गा पूजा पंडाल के अध्यक्ष की कहानी सुनकर आप जरूर अचंभित हो जाएंगे। पिछले 40 वर्षों से बोकारो सेल में काम करने वाले रिटायर्ड राजेश्वर सिंह सेक्टर 2 c में पूजा करते आ रहे हैं। वर्ष 2021 के जनवरी महीने से राजेश्वर सिंह किडनी बीमारी से ग्रसित है। एक दिन छोड़कर उनका डायलिसिस भी होता है। लेकिन बीमारी के बावजूद इनका मनोबल और जज्बा इतना मजबूत है कि वह बीमार होने के बाद भी बाहर से प्रत्येक वर्ष दुर्गा पूजा करने के लिए बोकारो आते है। राजेश्वर सिंह का कहना है की मां दुर्गा के कारण ही वह अभी तक इस गंभीर बीमारी में भी जिंदा है, लोग भी इनके हौसले को सलाम कर रहे हैं।

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राजेश्वर सिंह से जब उनको मिलने वाले बाल और शक्ति पर सवाल किया गया तो उनकी आंखें भर आई और वह फफक फफक कर रोने लगे। उनका कहना है की मां की शक्ति से ही वह आज तक जिंदा है क्योंकि एक दिन छोड़कर जब उनका डायलिसिस होता है तो उन्हें काफी तकलीफ होती है लेकिन डायलिसिस कर घंटे होने के बाद भी वह पंडाल में पहुंच जाते हैं।

उनका कहना है कि मुझे कमेटी का बहुत सहयोग मिलता है।
उनका कहना है कि मैं मन से यही प्रार्थना करता हूं की मां मुझे स्वस्थ रखें और इसी तरह में उनकी सेवा में हर वर्ष आकर पूजा करता रहूं।

उनके तीन बेटियां और दो बेटे हैं एक बेटी उत्तर प्रदेश में एसडीएम है जबकि सभी अधिकारी है।
पूजा में सहयोग करने वाले कहते हैं कि जब से वह पूजा करने के लिए सेक्टर 2 पहुंचे हैं, तब से उनके बच्चे उनकी बीमारी की वजह के बाद भी पूजा करने के लिए बोकारो आने पर नाराज है ।वह उनसे बात भी नहीं करते है।
पूजा कमेटी के लोगों का कहना है की हाल किसी कोई बीमारी होती है तो लोग घरों से निकालना पसंद नहीं करते। लेकिन इतनी गंभीर बीमारी होने के बाद भी वह पूजा करने के लिए खींचे चले आते हैं यह मन की शक्ति का ही नतीजा है।

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